
एक circuit पैकेज
दो धाम यात्रा सरल — केदारनाथ और बद्रीनाथ (5 रात / 6 दिन)
चार धाम में से दो धाम, हरिद्वार से शुरू, हिंदी-भाषी यात्रा-नायक के साथ शेयरिंग कोच में। रु 14,900 प्रति व्यक्ति (दो लोग एक कमरे में) से।
पारंपरिक क्रम
पहले से तय बुकिंग
सहज गति
जानकारी-पुस्तिका साथ
हरिद्वार रेलवे स्टेशन से शुरू और वहीं समाप्त होने वाली सीधी-सरल छह-दिनी यात्रा। देवप्रयाग और रुद्रप्रयाग होते हुए शेयरिंग कोच, पहाड़ों में मानक 3-स्टार होटल और केदारनाथ बेस पर साफ-सुथरा धर्मशाला कमरा, हिंदी बोलने वाला यात्रा-नायक, और एक स्पष्ट सूची — क्या शामिल है, क्या नहीं। पहली बार दो धाम जाने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बनाई गई यात्रा।
दिन-प्रतिदिन
कार्यक्रम
6 दिन · विस्तार हेतु क्लिक करें
दिन में किसी भी समय हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुँचिए। समूह की तरफ से होटल तक स्थानांतरण — हर की पौड़ी से पैदल दूरी पर मानक 3-स्टार होटल। चेक-इन और थोड़े आराम के बाद, यात्रा-नायक हिंदी और अंग्रेज़ी में 45 मिनट की समीक्षा बैठक लेता है — आगे का रास्ता, केदारनाथ चढ़ाई के लिए डेपैक में क्या रखना है, पंजीकरण की औपचारिकता, ऊँचाई की सलाह, चिकित्सा किट और आपातकालीन संपर्क। शाम 5:30 बजे तक पूरा समूह हर की पौड़ी की तरफ चल पड़ता है — पीतल के दीप, शंखनाद, और गंगा में बहते जलते दीये। रात का भोजन होटल के पास शुद्ध शाकाहारी सात्विक रसोई में। जल्दी सोइए — कोच सुबह निकलेगा।
सूचना पिकअप का समय: हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक। हवाई जहाज़ से आने वाले श्रद्धालु देहरादून तक आएँ और वहाँ से अपने खर्च पर प्री-पेड टैक्सी से हरिद्वार पहुँचें (लगभग रु 1,200)। होटल और चेक-पोस्ट पंजीकरण के लिए कृपया अपनी पहचान का छपा हुआ कागज़ साथ रखें।
सुबह जल्दी निकलना है — 6 बजे नाश्ता, 6:30 तक कोच रवाना। सड़क ऋषिकेश होते हुए मैदानों से ऊपर चढ़ती है और अलकनंदा घाटी में मिलती है। पहला बड़ा रुकाव देवप्रयाग — संगम जहाँ अलकनंदा और भागीरथी मिलकर गंगा बनती हैं। संगम तक नीचे थोड़ी पैदल चहलकदमी, फ़ोटो का समय, और यात्रा-नायक भौगोलिक स्थिति की संक्षिप्त जानकारी देता है। आगे रुद्रप्रयाग (अलकनंदा और मंदाकिनी का संगम) होते हुए सड़क गुप्तकाशी की ओर मुड़ जाती है। शाम तक गुप्तकाशी पहुँचना। चेक-इन, होटल की सात्विक रसोई में गरम रात का भोजन, और जल्दी आराम — कल चढ़ाई का दिन है।
सूचना लगभग 210 किमी, रुकावों सहित 8-9 घंटे। पूरा रास्ता पहाड़ी मोड़ों का है; अगर आपको चक्कर आने की समस्या हो तो दवा साथ रखिए। रुद्रप्रयाग के बाद मोबाइल नेटवर्क और एटीएम कम मिलते हैं — पहले से नकद निकाल लीजिए और ऑफ़लाइन नक्शे उतार लीजिए।
चढ़ाई का दिन। 4:30 बजे जल्दी नाश्ता, 6 बजे तक कोच सोनप्रयाग। सोनप्रयाग से शेयरिंग जीप गौरीकुंड — चढ़ाई यहीं से शुरू होती है। 16 किमी का रास्ता गौरीकुंड से जंगल चट्टी, भीमबली, लिनचौली होते हुए केदारनाथ बेस तक चढ़ता है। अधिकांश पैदल चलने वालों को 7-9 घंटे लगते हैं; जो पूरी दूरी पैदल नहीं चल सकते, उनके लिए गौरीकुंड पर घोड़ा, पालकी और कुली ज़िला प्रशासन की निर्धारित प्रीपेड दर पर मिल जाते हैं। फाटा या सेरसी से हेलीकॉप्टर अलग व्यवस्था है — मौसम और स्लॉट उपलब्धता के अधीन। देर दोपहर तक केदारनाथ बेस पहुँचना। धर्मशाला-स्तर के कमरे में चेक-इन (साधारण, दो या चार लोग एक कमरे में), गरम रात का भोजन, और आराम — मंदिर थोड़ी दूरी पर ही है। यदि शक्ति बची हो तो अपनी गति से शाम के दर्शन।
सूचना चढ़ाई का दर्जा मध्यम से कठिन — एक तरफ़ 16 किमी, 3,583 मीटर तक धीरे-धीरे चढ़ाई। साथ रखें: गरम कपड़े (मई-जून में भी तापमान 5 डिग्री तक गिर जाता है), बरसाती, छड़ी (गौरीकुंड पर रु 30 में किराये पर), टॉर्च, पहचान-पत्र, ज़रूरी दवाएँ, धीरे पचने वाला ग्लूकोज़। घोड़ा एक तरफ़ लगभग रु 3,350-3,500 (2026 की प्रीपेड काउंटर दर, ज़िला प्रशासन द्वारा निर्धारित, समय-समय पर संशोधित)। फाटा से हेलीकॉप्टर एक तरफ़ लगभग रु 4,500-7,000 — टिकट केवल आईआरसीटीसी से।
प्रातः-पूर्व केदारनाथ मंदिर में दर्शन — ज्योतिर्लिंग जो केदारनाथ शिखर की तलहटी में स्थापित है, एक पत्थर के मंदिर में जो पांडव काल से खड़ा है (वर्तमान रूप 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्निर्मित)। दर्शन और गरम नाश्ते के बाद समूह उतरना शुरू करता है — वही रास्ता, 16 किमी वापस गौरीकुंड तक। उतरते समय धीरे चलिए; घुटनों पर चढ़ाई से ज़्यादा असर उतरने पर पड़ता है। गौरीकुंड से सोनप्रयाग तक शेयरिंग जीप, फिर चमोली और पीपलकोटी होते हुए कोच जोशीमठ। शाम तक जोशीमठ पहुँचना। मानक होटल में चेक-इन, गरम रात का भोजन, और विश्राम।
सूचना उतरने के लिए एक जोड़ी अतिरिक्त मोज़े और सूखे जूते साथ रखिए। केदारनाथ मंदिर 4 बजे खुलता है; शांत दर्शन के लिए 4:30 तक पंक्ति में लग जाइए। जोशीमठ की ऊँचाई 1,890 मीटर है — केदारनाथ से बहुत कम — अधिकांश तीर्थयात्रियों को यहाँ ऊँचाई से राहत मिलती है।
एक बार फिर सुबह जल्दी — कोच 6 बजे बद्रीनाथ के लिए निकलता है। सड़क विष्णुप्रयाग (अलकनंदा और धौलीगंगा का संगम) और हनुमान चट्टी होते हुए चढ़ती है और 8:30 तक बद्रीनाथ पहुँचा देती है। बद्री विशाल मंदिर में दर्शन — भगवान विष्णु का धाम, नर और नारायण पर्वतों के बीच, अलकनंदा बहती हुई पास से, और मंदिर के प्रवेश पर तप्त कुंड का गरम जल। दर्शन के बाद माणा गाँव की छोटी यात्रा — भारत-तिब्बत सीमा से पहले का अंतिम गाँव, सरस्वती का उद्गम, और जहाँ वेद व्यास ने महाभारत कहलाई थी, ऐसी मान्यता है। दोपहर का भोजन बद्रीनाथ या माणा में अपने खर्च पर। देर दोपहर तक जोशीमठ वापसी। रात का भोजन और विश्राम।
सूचना बद्रीनाथ की ऊँचाई 3,133 मीटर है — गर्मियों में भी गरम कपड़े ज़रूरी हैं। तप्त कुंड स्नान वैकल्पिक और निःशुल्क है; स्नान करना हो तो बदलने के कपड़े साथ रखिए। माणा बद्रीनाथ से 3 किमी आगे है; शेयरिंग टैक्सी एक तरफ़ रु 50-100 प्रति व्यक्ति। सीमा क्षेत्र — भारतीय पहचान-पत्र अनिवार्य।
सड़क का आख़िरी दिन। जल्दी नाश्ता, 6:30 तक कोच रवाना। यात्रा अलकनंदा घाटी को वापस तय करती है — कर्णप्रयाग (अलकनंदा और पिंडार का संगम), रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग, ऋषिकेश, और हरिद्वार में प्रवेश। कोच में लंबा दिन, तीन भोजन-और-पैर सीधे करने के रुकाव। शाम तक हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुँचना — दिल्ली, लखनऊ, मुंबई और आगे की देर रात की ट्रेनों के लिए समय रहते। यात्रा-नायक आख़िरी श्रद्धालु को ट्रेन में चढ़ता हुआ देख कर ही कोच को बेस की ओर लौटाता है।
सूचना लगभग 290 किमी, रुकावों सहित 9-10 घंटे। हरिद्वार से अपनी वापसी की ट्रेन रात 8 बजे या उसके बाद की ही बुक करें — सुरक्षित रहेगा। अगर दिल्ली से आगे की उड़ान है तो उसे देर रात या अगली सुबह की रखें — हरिद्वार से देर शाम की कोई ट्रेन लें (बुकिंग के समय ताज़ा समय-सारणी ज़रूर जाँच लें) और वहाँ से पहले से बुक की हुई टैक्सी। हम जोड़ने में आपकी मदद करेंगे।
कहानी
इस पैकेज के बारे में
पहला दिन। हर की पौड़ी, शाम 6:30। घाट पर पीतल के दीप जल रहे हैं, गंगा का रंग साँझ जैसा है, और पंडित जी अंगवस्त्र बाँध रहे हैं — गंगा आरती की तैयारी हो चुकी है। आप अपने समूह के साथ पहुँचते हैं, यात्रा-नायक हिंदी और अंग्रेज़ी में छपा हुआ कार्यक्रम आपके हाथ में रखता है, और सब मिलकर घाट उतरते हैं। कल सुबह कोच पहाड़ों के लिए चलेगा।
यह है — दो धाम यात्रा सरल। पाँच रात, छह दिन। केदारनाथ और बद्रीनाथ — हिमालय के दो धाम जहाँ उत्तर भारत के तीर्थयात्री पीढ़ियों से जाते आए हैं। यह यात्रा उन परिवारों के लिए बनी है जो सीमित बजट में दो धाम के दर्शन करना चाहते हैं — शेयरिंग कोच, मानक होटल, हिंदी में संचालन, और एक स्पष्ट सूची क्या-क्या शामिल है।
रास्ता — सीधी बात में
दूसरे दिन हरिद्वार से गुप्तकाशी, देवप्रयाग और रुद्रप्रयाग होते हुए। सड़क पहले अलकनंदा के साथ, फिर मंदाकिनी के साथ चलती है। देवप्रयाग के संगम पर रुकाव — जहाँ अलकनंदा और भागीरथी मिलकर गंगा बनती हैं। तीसरा दिन पैदल चढ़ाई का दिन है — सुबह जल्दी सोनप्रयाग, वहाँ से शेयरिंग जीप गौरीकुंड, और फिर 16 किमी की चढ़ाई केदारनाथ तक। जो श्रद्धालु पैदल नहीं चल सकते, उनके लिए गौरीकुंड पर घोड़ा या पालकी की व्यवस्था ज़िला प्रशासन द्वारा तय प्रीपेड काउंटर दर पर हो जाती है। फाटा या सेरसी से हेलीकॉप्टर अलग से जोड़ा जा सकता है — मौसम और उपलब्धता के अधीन।
चौथे दिन सुबह दर्शन के बाद वापसी — गौरीकुंड, और फिर सड़क मार्ग से जोशीमठ। जोशीमठ बद्रीनाथ का प्रवेश-द्वार है — आदि शंकराचार्य का मठ यहीं है, और सर्दियों में भगवान बद्री विशाल का प्रवास भी। पाँचवाँ दिन बद्रीनाथ का दिन है — सुबह जल्दी हनुमान चट्टी और विष्णुप्रयाग होते हुए ऊपर, बद्री विशाल मंदिर में दर्शन, छोटा सा फेरा माणा गाँव का — तिब्बत सीमा से पहले का अंतिम गाँव, जहाँ सरस्वती पत्थरों के बीच से निकलती है — और शाम तक वापस जोशीमठ। छठा दिन — कर्णप्रयाग और देवप्रयाग होते हुए हरिद्वार वापसी, शाम तक स्टेशन पर छोड़ दिया जाता है।
हम क्या-क्या सँभालते हैं
पूरे रास्ते के लिए नॉन-एसी टेम्पो ट्रैवलर या शेयरिंग कोच, हिंदी बोलने वाला यात्रा-नायक जिसने यह मार्ग कई सत्र किया है, उत्तराखंड टूरिस्ट केयर पोर्टल (registrationandtouristcare.uk.gov.in) पर अनिवार्य अग्रिम यात्रा पंजीकरण, गुप्तकाशी और जोशीमठ में मानक होटल, केदारनाथ बेस पर धर्मशाला-शैली का कमरा, हर पड़ाव पर शुद्ध शाकाहारी सात्विक रसोई से नाश्ता और रात का भोजन, और पहले दिन से एक व्हाट्सऐप समूह जिसमें आपके यात्रा-नायक और हमारा कार्यालय दोनों हैं। पीने के पानी की बोतलें और प्राथमिक चिकित्सा का सामान कोच में साथ चलता है।
यह यात्रा क्या नहीं है
यह निजी गाड़ी की यात्रा नहीं है, और न ही हेली-दर्शन का पैकेज है। बस में पंद्रह सह-यात्री तक हो सकते हैं। होटल साफ-सुथरे और काम-चलाऊ हैं — बूटीक नहीं। बस में सीट तय नहीं होती, और बिना अतिरिक्त भुगतान के अकेले कमरा भी नहीं मिलता। अगर आपको निजी गाड़ी चाहिए, डीलक्स होटल चाहिए, या निश्चित हेली दर्शन चाहिए — तो कृपया हमारा मध्यम या संपूर्ण स्तर का पैकेज पूछिए। सरल स्तर उन लोगों के लिए है जो केवल दर्शन, धाम और सड़क चाहते हैं — बिना उस सब के लिए पैसा दिए जो ज़रूरी नहीं।
आपको क्या मिलेगा
मुख्य आकर्षण
व्यवस्था
क्या शामिल है
शामिल
- पूरे रास्ते शेयरिंग कोच (नॉन-एसी) हरिद्वार से हरिद्वार
- 5 रातों का आवास (गुप्तकाशी में 2, केदारनाथ बेस में 1, जोशीमठ में 2) दो लोग एक कमरे में
- रोज़ का नाश्ता और रात का भोजन — शुद्ध शाकाहारी सात्विक रसोई से
- पूरी अवधि के लिए हिंदी बोलने वाला यात्रा-नायक
- उत्तराखंड टूरिस्ट केयर पोर्टल (registrationandtouristcare.uk.gov.in) पर हर तीर्थयात्री का अनिवार्य अग्रिम पंजीकरण; सोनप्रयाग चेक-पोस्ट पर दस्तावेज़ सत्यापन
- सोनप्रयाग से गौरीकुंड शेयरिंग जीप (आना-जाना)
- कोच में पीने के पानी की बोतलें और प्राथमिक चिकित्सा किट
- चालक भत्ता, पार्किंग, टोल, ईंधन और राज्य कर
- पहले दिन से व्हाट्सऐप सहायता समूह
- घर वालों के लिए कार्यालय का संपर्क नंबर
शामिल नहीं
- हरिद्वार आने-जाने का रेल या हवाई किराया
- केदारनाथ चढ़ाई के लिए घोड़ा, पालकी, कुली या हेलीकॉप्टर (गौरीकुंड / फाटा पर सरकारी प्रीपेड काउंटर की प्रचलित दर पर अलग से लिया जा सकता है)
- दोपहर का भोजन
- मंदिर में चढ़ावा और दक्षिणा
- मंदिर काउंटर पर लिए जाने वाले शीघ्र-दर्शन पास, यदि आप लें
- व्यक्तिगत खर्च — बोतलबंद ठंडे पेय, अतिरिक्त मिनरल वाटर, कपड़े धुलवाना, फ़ोन कॉल
- यात्रा बीमा और चिकित्सकीय निकासी
- भूस्खलन, सड़क बंद, मौसम या यात्रा-स्थगन के कारण उत्पन्न कोई अतिरिक्त खर्च — हमारे नियंत्रण से बाहर
- अकेले कमरे का अधिभार (अनुरोध पर)
- लागू जीएसटी
बुकिंग से पहले
यात्री अक्सर यह पूछते हैं
₹17,999 में क्या शामिल है, और अलग से क्या देना होगा?
₹17,999 में गुप्तकाशी, केदारनाथ और जोशीमठ में पांच रातें ट्विन-शेयरिंग आधार पर, पूरे रूट के लिए शेयर्ड कोच परिवहन और सोनप्रयाग-गौरीकुंड के बीच शेयर्ड जीप, सात्विक रसोई में रोज़ नाश्ता-डिनर, हिंदी-भाषी यात्रा प्रमुख, और पहले से पूरा किया गया उत्तराखंड पंजीकरण शामिल है। केदारनाथ चढ़ाई के लिए घोड़ा, पालकी, पोर्टर या हेलीकॉप्टर का खर्च, दोपहर का भोजन, मंदिर में भेंट और सिंगल-रूम शुल्क अलग से देना होता है।
क्या पंजीकरण मेरी ओर से करवाया जाता है?
हां — आपके पूरे समूह का उत्तराखंड टूरिस्ट केयर पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण यात्रा से पहले ही पूरा कर दिया जाता है, बुकिंग के समय दी गई पहचान-पत्र जानकारी के आधार पर, ताकि हरिद्वार या सोनप्रयाग में आपको खुद कागज़ी काम न करना पड़े।
केदारनाथ की चढ़ाई वाकई कितनी कठिन है?
यह सचमुच मेहनत मांगती है — गौरीकुंड से केदारनाथ तक की चढ़ाई लगभग 16-18 किलोमीटर की है, जो लगातार बढ़ते हुए करीब 3,583 मीटर की ऊंचाई तक जाती है, और ज़्यादातर तीर्थयात्रियों को स्थिर गति से भी चढ़ने में 7-9 घंटे लगते हैं। यह पूरे पैकेज का सबसे कठिन दिन है, इसलिए ठीक जूते पहनें और जल्दबाज़ी न करें।
क्या घोड़ा या हेलीकॉप्टर लिया जा सकता है, और इसका खर्च कितना है?
हां, गौरीकुंड में दोनों सरकारी दरों पर उपलब्ध हैं, हालांकि ये हमारी कीमत में शामिल नहीं हैं — घोड़े का मौजूदा एकतरफा किराया लगभग ₹3,350-3,500 है, और फाटा से हेलीकॉप्टर का एकतरफा किराया करीब ₹4,500-7,000 है, पर ये आंकड़े सीज़न-दर-सीज़न बदलते हैं इसलिए वहां पहुंचकर मौजूदा दर ज़रूर पुष्टि कर लें। केदारनाथ हेलीकॉप्टर सीट केवल आधिकारिक IRCTC HeliYatra पोर्टल से बिकती हैं और रिलीज़ होते ही मिनटों में खत्म हो जाती हैं, इसलिए हम सीट की गारंटी नहीं दे सकते, भले ही आप चाहें।
केदारनाथ में ठहराव कैसा है?
केदारनाथ में सिर्फ धर्मशाला-स्तर के कमरे मिलते हैं — साधारण, ट्विन या क्वाड-शेयरिंग ठहराव, होटल-स्तर का नहीं — क्योंकि 2013 की बाढ़ के बाद यह बस्ती छोटी और नए सिरे से बसाई गई है। हमारी योजना में यहां सिर्फ एक रात है, बाकी हर रात ठीक-ठाक 3-स्टार होटल में ठहराव है।
2027 सीज़न कब शुरू होगा?
उत्तराखंड सरकार ने अभी 2027 की तारीखें घोषित नहीं की हैं — ये परंपरागत रूप से महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी पर घोषित होती हैं, और 2027 में दोनों फरवरी में पड़ रहे हैं। संदर्भ के लिए, 2026 सीज़न में केदारनाथ 22 अप्रैल को खुला था; 2027 की तारीखें आते ही हम आपकी यात्रा की सही तारीख तय कर देंगे।
क्या बद्रीनाथ भी एक ट्रेक है?
नहीं — बद्रीनाथ मंदिर तक सड़क सीधे पहुंचती है, इसलिए पांचवें दिन कोई चढ़ाई नहीं करनी पड़ती; दर्शन के बाद हम आपको माणा गांव भी ले जाते हैं, जिसे इस रूट का आखिरी भारतीय गांव माना जाता है, साथ ही पास की व्यास और गणेश गुफाएं भी।
मुझे कौन-सी स्वास्थ्य सावधानी बरतनी चाहिए?
इसे गंभीरता से लें: 2026 के चार धाम सीज़न में 200 से अधिक तीर्थयात्रियों की मृत्यु दर्ज हुई, और इसका सबसे बड़ा कारण ऊंचाई पर पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़ा हृदयाघात बताया गया, न कि चढ़ाई की थकान। अगर आपको हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या कोई पुरानी बीमारी है, तो बुकिंग से पहले डॉक्टर से सलाह लें और यात्रा के दौरान नियमित दवा न छोड़ें।
अगर मेरी तारीखों में रास्ता मौसम की वजह से बंद हो जाए तो क्या होगा?
मानसून में, खासकर जुलाई के अंत और अगस्त की शुरुआत में, इस रूट पर छोटी रुकावटें सामान्य बात हैं, और प्रशासन सुरक्षा कारणों से सोनप्रयाग से आगे आवाजाही बिना ज़्यादा सूचना के रोक सकता है। अगर ऐसा हो, तो हम यात्रा रद्द करने की बजाय आपका कार्यक्रम बदलने या ट्रेक वाला दिन आगे खिसकाने में मदद करेंगे।
पूछताछ करें
अपना नाम और नंबर लिखें, हमारी टीम आपको फ़ोन करेगी।
आरंभिक मूल्य
₹17,999
प्रति व्यक्ति
WhatsApp पर कुछ ही मिनटों में जवाब · सुबह 7 – रात 10 बजे
Trusted by Pilgrims
“We came for my mother's 75th birthday darshan. Satmarg arranged wheelchair access, a pandit who spoke her dialect, and a private boat for her Ganga aarti.”
“Third time using Satmarg. The cab service is top-notch — AC Innova, polite driver, no surprise charges.”
Udyam-registered MSME · UDYAM-UP-75-0177698
Varanasi-based operator · local guides & pandits
Hindi & English support · 7 AM–10 PM



