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दो धाम यात्रा सरल — केदारनाथ और बद्रीनाथ (5 रात / 6 दिन)

चार धाम में से दो धाम, हरिद्वार से शुरू, हिंदी-भाषी यात्रा-नायक के साथ शेयरिंग कोच में। रु 14,900 प्रति व्यक्ति (दो लोग एक कमरे में) से।

6 दिन · 5 रातेंmoderate गतिछोटा समूह · अधिकतम 15
01

पारंपरिक क्रम

मंदिर और स्थल अपने पारंपरिक क्रम में।

02

पहले से तय बुकिंग

मुख्य अनुष्ठानों के लिए आरक्षित बैठक, ज़रूरी बुकिंग पहले से सुनिश्चित।

03

सहज गति

सहज दिन, बीच में योजनाबद्ध विश्राम।

04

जानकारी-पुस्तिका साथ

छपी हुई जानकारी-पुस्तिका — अर्थ, नक्शे, सांस्कृतिक प्रोटोकॉल।

हरिद्वार रेलवे स्टेशन से शुरू और वहीं समाप्त होने वाली सीधी-सरल छह-दिनी यात्रा। देवप्रयाग और रुद्रप्रयाग होते हुए शेयरिंग कोच, पहाड़ों में मानक 3-स्टार होटल और केदारनाथ बेस पर साफ-सुथरा धर्मशाला कमरा, हिंदी बोलने वाला यात्रा-नायक, और एक स्पष्ट सूची — क्या शामिल है, क्या नहीं। पहली बार दो धाम जाने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बनाई गई यात्रा।

दिन-प्रतिदिन

कार्यक्रम

कहानी

इस पैकेज के बारे में

पहला दिन। हर की पौड़ी, शाम 6:30। घाट पर पीतल के दीप जल रहे हैं, गंगा का रंग साँझ जैसा है, और पंडित जी अंगवस्त्र बाँध रहे हैं — गंगा आरती की तैयारी हो चुकी है। आप अपने समूह के साथ पहुँचते हैं, यात्रा-नायक हिंदी और अंग्रेज़ी में छपा हुआ कार्यक्रम आपके हाथ में रखता है, और सब मिलकर घाट उतरते हैं। कल सुबह कोच पहाड़ों के लिए चलेगा।

यह है — दो धाम यात्रा सरल। पाँच रात, छह दिन। केदारनाथ और बद्रीनाथ — हिमालय के दो धाम जहाँ उत्तर भारत के तीर्थयात्री पीढ़ियों से जाते आए हैं। यह यात्रा उन परिवारों के लिए बनी है जो सीमित बजट में दो धाम के दर्शन करना चाहते हैं — शेयरिंग कोच, मानक होटल, हिंदी में संचालन, और एक स्पष्ट सूची क्या-क्या शामिल है।

रास्ता — सीधी बात में

दूसरे दिन हरिद्वार से गुप्तकाशी, देवप्रयाग और रुद्रप्रयाग होते हुए। सड़क पहले अलकनंदा के साथ, फिर मंदाकिनी के साथ चलती है। देवप्रयाग के संगम पर रुकाव — जहाँ अलकनंदा और भागीरथी मिलकर गंगा बनती हैं। तीसरा दिन पैदल चढ़ाई का दिन है — सुबह जल्दी सोनप्रयाग, वहाँ से शेयरिंग जीप गौरीकुंड, और फिर 16 किमी की चढ़ाई केदारनाथ तक। जो श्रद्धालु पैदल नहीं चल सकते, उनके लिए गौरीकुंड पर घोड़ा या पालकी की व्यवस्था ज़िला प्रशासन द्वारा तय प्रीपेड काउंटर दर पर हो जाती है। फाटा या सेरसी से हेलीकॉप्टर अलग से जोड़ा जा सकता है — मौसम और उपलब्धता के अधीन।

चौथे दिन सुबह दर्शन के बाद वापसी — गौरीकुंड, और फिर सड़क मार्ग से जोशीमठ। जोशीमठ बद्रीनाथ का प्रवेश-द्वार है — आदि शंकराचार्य का मठ यहीं है, और सर्दियों में भगवान बद्री विशाल का प्रवास भी। पाँचवाँ दिन बद्रीनाथ का दिन है — सुबह जल्दी हनुमान चट्टी और विष्णुप्रयाग होते हुए ऊपर, बद्री विशाल मंदिर में दर्शन, छोटा सा फेरा माणा गाँव का — तिब्बत सीमा से पहले का अंतिम गाँव, जहाँ सरस्वती पत्थरों के बीच से निकलती है — और शाम तक वापस जोशीमठ। छठा दिन — कर्णप्रयाग और देवप्रयाग होते हुए हरिद्वार वापसी, शाम तक स्टेशन पर छोड़ दिया जाता है।

हम क्या-क्या सँभालते हैं

पूरे रास्ते के लिए नॉन-एसी टेम्पो ट्रैवलर या शेयरिंग कोच, हिंदी बोलने वाला यात्रा-नायक जिसने यह मार्ग कई सत्र किया है, उत्तराखंड टूरिस्ट केयर पोर्टल (registrationandtouristcare.uk.gov.in) पर अनिवार्य अग्रिम यात्रा पंजीकरण, गुप्तकाशी और जोशीमठ में मानक होटल, केदारनाथ बेस पर धर्मशाला-शैली का कमरा, हर पड़ाव पर शुद्ध शाकाहारी सात्विक रसोई से नाश्ता और रात का भोजन, और पहले दिन से एक व्हाट्सऐप समूह जिसमें आपके यात्रा-नायक और हमारा कार्यालय दोनों हैं। पीने के पानी की बोतलें और प्राथमिक चिकित्सा का सामान कोच में साथ चलता है।

यह यात्रा क्या नहीं है

यह निजी गाड़ी की यात्रा नहीं है, और न ही हेली-दर्शन का पैकेज है। बस में पंद्रह सह-यात्री तक हो सकते हैं। होटल साफ-सुथरे और काम-चलाऊ हैं — बूटीक नहीं। बस में सीट तय नहीं होती, और बिना अतिरिक्त भुगतान के अकेले कमरा भी नहीं मिलता। अगर आपको निजी गाड़ी चाहिए, डीलक्स होटल चाहिए, या निश्चित हेली दर्शन चाहिए — तो कृपया हमारा मध्यम या संपूर्ण स्तर का पैकेज पूछिए। सरल स्तर उन लोगों के लिए है जो केवल दर्शन, धाम और सड़क चाहते हैं — बिना उस सब के लिए पैसा दिए जो ज़रूरी नहीं।

आपको क्या मिलेगा

मुख्य आकर्षण

चार धाम में से दो धाम — केदारनाथ ज्योतिर्लिंग और बद्रीनाथ धाम — एक ही छह-दिनी यात्रा में हरिद्वार से
हरिद्वार रेलवे स्टेशन से शुरू और वहीं समाप्त — दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, मुंबई से ट्रेन से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाजनक
पूरे रास्ते के लिए हिंदी बोलने वाला यात्रा-नायक — समूह को संभालना, दर्शन की पंक्ति, चेक-पोस्ट पंजीकरण
गुप्तकाशी और जोशीमठ में मानक 3-स्टार होटल, केदारनाथ बेस पर धर्मशाला-स्तर का कमरा
हर दिन का नाश्ता और रात का भोजन शामिल — हर पड़ाव पर शुद्ध शाकाहारी सात्विक रसोई से
गौरीकुंड से केदारनाथ तक 16 किमी की पैदल चढ़ाई, सोनप्रयाग से गौरीकुंड शेयरिंग जीप शामिल; घोड़ा, पालकी या हेलीकॉप्टर प्रचलित दर पर अलग से उपलब्ध
रु 14,900 प्रति व्यक्ति (दो लोग एक कमरे में) से शुरू — स्पष्ट सूची, कोई छुपा शुल्क नहीं

व्यवस्था

क्या शामिल है

शामिल

  • पूरे रास्ते शेयरिंग कोच (नॉन-एसी) हरिद्वार से हरिद्वार
  • 5 रातों का आवास (गुप्तकाशी में 2, केदारनाथ बेस में 1, जोशीमठ में 2) दो लोग एक कमरे में
  • रोज़ का नाश्ता और रात का भोजन — शुद्ध शाकाहारी सात्विक रसोई से
  • पूरी अवधि के लिए हिंदी बोलने वाला यात्रा-नायक
  • उत्तराखंड टूरिस्ट केयर पोर्टल (registrationandtouristcare.uk.gov.in) पर हर तीर्थयात्री का अनिवार्य अग्रिम पंजीकरण; सोनप्रयाग चेक-पोस्ट पर दस्तावेज़ सत्यापन
  • सोनप्रयाग से गौरीकुंड शेयरिंग जीप (आना-जाना)
  • कोच में पीने के पानी की बोतलें और प्राथमिक चिकित्सा किट
  • चालक भत्ता, पार्किंग, टोल, ईंधन और राज्य कर
  • पहले दिन से व्हाट्सऐप सहायता समूह
  • घर वालों के लिए कार्यालय का संपर्क नंबर

शामिल नहीं

  • हरिद्वार आने-जाने का रेल या हवाई किराया
  • केदारनाथ चढ़ाई के लिए घोड़ा, पालकी, कुली या हेलीकॉप्टर (गौरीकुंड / फाटा पर सरकारी प्रीपेड काउंटर की प्रचलित दर पर अलग से लिया जा सकता है)
  • दोपहर का भोजन
  • मंदिर में चढ़ावा और दक्षिणा
  • मंदिर काउंटर पर लिए जाने वाले शीघ्र-दर्शन पास, यदि आप लें
  • व्यक्तिगत खर्च — बोतलबंद ठंडे पेय, अतिरिक्त मिनरल वाटर, कपड़े धुलवाना, फ़ोन कॉल
  • यात्रा बीमा और चिकित्सकीय निकासी
  • भूस्खलन, सड़क बंद, मौसम या यात्रा-स्थगन के कारण उत्पन्न कोई अतिरिक्त खर्च — हमारे नियंत्रण से बाहर
  • अकेले कमरे का अधिभार (अनुरोध पर)
  • लागू जीएसटी

बुकिंग से पहले

यात्री अक्सर यह पूछते हैं

₹17,999 में क्या शामिल है, और अलग से क्या देना होगा?

₹17,999 में गुप्तकाशी, केदारनाथ और जोशीमठ में पांच रातें ट्विन-शेयरिंग आधार पर, पूरे रूट के लिए शेयर्ड कोच परिवहन और सोनप्रयाग-गौरीकुंड के बीच शेयर्ड जीप, सात्विक रसोई में रोज़ नाश्ता-डिनर, हिंदी-भाषी यात्रा प्रमुख, और पहले से पूरा किया गया उत्तराखंड पंजीकरण शामिल है। केदारनाथ चढ़ाई के लिए घोड़ा, पालकी, पोर्टर या हेलीकॉप्टर का खर्च, दोपहर का भोजन, मंदिर में भेंट और सिंगल-रूम शुल्क अलग से देना होता है।

क्या पंजीकरण मेरी ओर से करवाया जाता है?

हां — आपके पूरे समूह का उत्तराखंड टूरिस्ट केयर पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण यात्रा से पहले ही पूरा कर दिया जाता है, बुकिंग के समय दी गई पहचान-पत्र जानकारी के आधार पर, ताकि हरिद्वार या सोनप्रयाग में आपको खुद कागज़ी काम न करना पड़े।

केदारनाथ की चढ़ाई वाकई कितनी कठिन है?

यह सचमुच मेहनत मांगती है — गौरीकुंड से केदारनाथ तक की चढ़ाई लगभग 16-18 किलोमीटर की है, जो लगातार बढ़ते हुए करीब 3,583 मीटर की ऊंचाई तक जाती है, और ज़्यादातर तीर्थयात्रियों को स्थिर गति से भी चढ़ने में 7-9 घंटे लगते हैं। यह पूरे पैकेज का सबसे कठिन दिन है, इसलिए ठीक जूते पहनें और जल्दबाज़ी न करें।

क्या घोड़ा या हेलीकॉप्टर लिया जा सकता है, और इसका खर्च कितना है?

हां, गौरीकुंड में दोनों सरकारी दरों पर उपलब्ध हैं, हालांकि ये हमारी कीमत में शामिल नहीं हैं — घोड़े का मौजूदा एकतरफा किराया लगभग ₹3,350-3,500 है, और फाटा से हेलीकॉप्टर का एकतरफा किराया करीब ₹4,500-7,000 है, पर ये आंकड़े सीज़न-दर-सीज़न बदलते हैं इसलिए वहां पहुंचकर मौजूदा दर ज़रूर पुष्टि कर लें। केदारनाथ हेलीकॉप्टर सीट केवल आधिकारिक IRCTC HeliYatra पोर्टल से बिकती हैं और रिलीज़ होते ही मिनटों में खत्म हो जाती हैं, इसलिए हम सीट की गारंटी नहीं दे सकते, भले ही आप चाहें।

केदारनाथ में ठहराव कैसा है?

केदारनाथ में सिर्फ धर्मशाला-स्तर के कमरे मिलते हैं — साधारण, ट्विन या क्वाड-शेयरिंग ठहराव, होटल-स्तर का नहीं — क्योंकि 2013 की बाढ़ के बाद यह बस्ती छोटी और नए सिरे से बसाई गई है। हमारी योजना में यहां सिर्फ एक रात है, बाकी हर रात ठीक-ठाक 3-स्टार होटल में ठहराव है।

2027 सीज़न कब शुरू होगा?

उत्तराखंड सरकार ने अभी 2027 की तारीखें घोषित नहीं की हैं — ये परंपरागत रूप से महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी पर घोषित होती हैं, और 2027 में दोनों फरवरी में पड़ रहे हैं। संदर्भ के लिए, 2026 सीज़न में केदारनाथ 22 अप्रैल को खुला था; 2027 की तारीखें आते ही हम आपकी यात्रा की सही तारीख तय कर देंगे।

क्या बद्रीनाथ भी एक ट्रेक है?

नहीं — बद्रीनाथ मंदिर तक सड़क सीधे पहुंचती है, इसलिए पांचवें दिन कोई चढ़ाई नहीं करनी पड़ती; दर्शन के बाद हम आपको माणा गांव भी ले जाते हैं, जिसे इस रूट का आखिरी भारतीय गांव माना जाता है, साथ ही पास की व्यास और गणेश गुफाएं भी।

मुझे कौन-सी स्वास्थ्य सावधानी बरतनी चाहिए?

इसे गंभीरता से लें: 2026 के चार धाम सीज़न में 200 से अधिक तीर्थयात्रियों की मृत्यु दर्ज हुई, और इसका सबसे बड़ा कारण ऊंचाई पर पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़ा हृदयाघात बताया गया, न कि चढ़ाई की थकान। अगर आपको हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या कोई पुरानी बीमारी है, तो बुकिंग से पहले डॉक्टर से सलाह लें और यात्रा के दौरान नियमित दवा न छोड़ें।

अगर मेरी तारीखों में रास्ता मौसम की वजह से बंद हो जाए तो क्या होगा?

मानसून में, खासकर जुलाई के अंत और अगस्त की शुरुआत में, इस रूट पर छोटी रुकावटें सामान्य बात हैं, और प्रशासन सुरक्षा कारणों से सोनप्रयाग से आगे आवाजाही बिना ज़्यादा सूचना के रोक सकता है। अगर ऐसा हो, तो हम यात्रा रद्द करने की बजाय आपका कार्यक्रम बदलने या ट्रेक वाला दिन आगे खिसकाने में मदद करेंगे।

पूछताछ करें

अपना नाम और नंबर लिखें, हमारी टीम आपको फ़ोन करेगी।

आरंभिक मूल्य

₹17,999

प्रति व्यक्ति

WhatsApp पर कुछ ही मिनटों में जवाब · सुबह 7 – रात 10 बजे

Trusted by Pilgrims

“We came for my mother's 75th birthday darshan. Satmarg arranged wheelchair access, a pandit who spoke her dialect, and a private boat for her Ganga aarti.”
Arvind & Meena Gupta · Delhi
“Third time using Satmarg. The cab service is top-notch — AC Innova, polite driver, no surprise charges.”
Vikram Singh · Jaipur

Udyam-registered MSME · UDYAM-UP-75-0177698

Varanasi-based operator · local guides & pandits

Hindi & English support · 7 AM–10 PM

WhatsApp पर कुछ ही मिनटों में जवाब · सुबह 7 – रात 10 बजे