
अपनी प्रयागराज यात्रा की योजना बनाइए
त्रिवेणी संगम स्नान, अक्षय वट, लेटे हनुमान जी, भारद्वाज आश्रम और माघ मेले की परंपरा — गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर बसे तीर्थराज में।
उत्तर प्रदेश · त्रिवेणी · तीर्थराज
परंपरा
प्रयागराज यात्रा क्या है?
प्रयागराज यात्रा का केंद्र है त्रिवेणी संगम — जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती मिलती हैं। परंपरा है कि यहाँ का स्नान सब तीर्थों का राजा है। सामान्य यात्रा में संगम स्नान, अक्षय वट (इलाहाबाद क़िले के भीतर का अमर वट वृक्ष), लेटे हनुमान मंदिर और भारद्वाज आश्रम आते हैं। बहुत से परिवार घाटों पर पिंडदान और तर्पण भी कराते हैं — पितृ-कर्म के लिए प्रयागराज उत्तर भारत के सबसे बड़े तीर्थों में गिना जाता है।
त्रिवेणी संगम
मिलन
अक्षय वट
अमर वट वृक्ष
लेटे हनुमान
लेटे हुए हनुमान जी
भारद्वाज आश्रम
रामायण का पड़ाव
दर्शन की योजना
संगम स्नान, बड़े हनुमान और अक्षय वट — दर्शन की योजना
प्रयागराज का दिन पानी से शुरू होता है। इलाहाबाद क़िले के पास के घाटों से नावें त्रिवेणी संगम के लिए निकलती हैं — गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन — और संगम पर ही नाव रुकती है, वहीं स्नान होता है। परंपरा में सूर्योदय की बेला सबसे शुभ मानी जाती है। नाव का भाड़ा मौसम और नाव के आकार से बदलता रहता है; हम आपको घाट पर मोल-भाव के लिए कभी नहीं छोड़ते — आपकी नाव पैकेज का हिस्सा होती है, WhatsApp पर लिखित पक्के कोटेशन में पहले से तय।
| स्थान | समय | ध्यान रखिए |
|---|---|---|
| त्रिवेणी संगम स्नान | सूर्योदय सबसे अच्छा | नाव से आना-जाना ~30–45 मिनट; स्नान संगम पर ही |
| बड़े हनुमान मंदिर | ~5:00 बजे सुबह खुलता है; दोपहर के विश्राम का समय बदलता रहता है | लेटे हनुमान जी का विग्रह, ज़मीन से 6–7 फ़ुट नीचे |
| अक्षय वट और पातालपुरी | ~7:00 बजे सुबह – 5:00 बजे शाम | इलाहाबाद क़िले के भीतर दर्शन-गलियारे से; फ़ोटो पहचान-पत्र अनिवार्य |
| भारद्वाज आश्रम | दिन के उजाले में | ऋषि का आश्रम, जहाँ वनवास जाते समय श्रीराम रुके थे |
संगम से कुछ ही क़दम पर बड़े हनुमान मंदिर है — एकमात्र मंदिर जहाँ हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में विराजते हैं। हर बरसात में, जब गंगा चढ़ती हैं, उनका जल गर्भगृह में आकर सबसे पहले विग्रह को छूता है — प्रयागवासी इसे हनुमान जी को गंगा स्नान कहते हैं, और पूरा शहर इसे देखने उमड़ता है। शास्त्रों का अमर वट-वृक्ष अक्षय वट इलाहाबाद क़िले के भीतर है और दर्शन-गलियारे से तीर्थयात्रियों के लिए खुला है।
और हर वर्ष माघ के महीने में (जनवरी–फ़रवरी) संगम की रेती एक तंबुओं का नगर बन जाती है — माघ मेला, कुंभ का छोटा रूप, जो हर वर्ष लगता है। हज़ारों कल्पवासी पूरा महीना नदी-तट पर तप के साथ रहने का व्रत लेते हैं — रोज़ स्नान, सत्संग और संयम। माघ मेला 2027 मकर संक्रांति (15 जनवरी 2027) से महाशिवरात्रि (6 मार्च 2027) तक चलेगा; बड़े स्नान-पर्व हैं पौष पूर्णिमा (22 जनवरी), मौनी अमावस्या (6 फ़रवरी), बसंत पंचमी (11 फ़रवरी) और माघी पूर्णिमा (20 फ़रवरी)।
पर्व के दिनों में समय बदल जाते हैं। Satmarg के साथ यात्रा करने पर हम आपके दर्शन से पहले हर समय दोबारा पक्का करते हैं — यह हमारे वचन का हिस्सा है।
यहाँ पहुँचना
प्रयागराज कैसे पहुँचें
प्रयागराज उत्तर भारत के तीर्थ-मानचित्र के बीचोबीच है — अयोध्या, काशी और चित्रकूट के बीच। हर Satmarg पैकेज में एयरपोर्ट या स्टेशन से पिकअप शामिल है।
| कहाँ से | हवाई मार्ग से | रेल से |
|---|---|---|
| दिल्ली | प्रयागराज एयरपोर्ट (IXD) तक ~1.5 घंटे | ~6–8 घंटे; रात की प्रयागराज एक्सप्रेस जाना-पहचाना पुराना विकल्प है |
| वाराणसी | — | ~125 किमी; रेल से 2–3 घंटे, या AC टैक्सी से ~3 घंटे |
| अयोध्या | — | सड़क से ~167 किमी (AC टैक्सी से ~4 घंटे); रेल भी चलती है |
| चित्रकूट | — | चित्रकूट धाम कर्वी से वंदे भारत ~2 घंटे; सड़क से ~130 किमी / ~3 घंटे |
| मुंबई / बेंगलुरु / कोलकाता | IXD तक उड़ानें या वाराणसी / लखनऊ होकर | रेल मार्ग लंबे हैं — हवाई यात्रा बेहतर |
बमरौली स्थित प्रयागराज एयरपोर्ट (IXD) संगम से लगभग 13 किमी दूर है — टैक्सी से क़रीब 40 मिनट। मुख्य स्टेशन प्रयागराज जंक्शन है, संगम के घाटों से लगभग 8 किमी। माघ मेले और कुंभ के दौरान संगम के पास की सड़कें गाड़ियों के लिए बंद रहती हैं; हमारे ड्राइवर आपको वहीं तक छोड़ते हैं जहाँ तक गाड़ी जाने की अनुमति है, और वहाँ से हमारी टीम का एक सदस्य आपके साथ पैदल चलता है।
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छोटी संगम यात्रा, पिंडदान सहित पूरी यात्रा, और माघ मेला विशेष।

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सतमार्ग ही क्यों
Satmarg आपकी यात्रा का ख़याल कैसे रखता है
लाइसेंसी नाव की बुकिंग
योग्य पंडित जी
संगम के पास के होटल
पूरी यात्रा में साथ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रयागराज यात्रा — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संगम स्नान का सबसे अच्छा समय क्या है?
किसी भी शुभ दिन सूर्योदय की बेला सबसे पुण्यदायी मानी जाती है। मौसम के हिसाब से अक्टूबर से मार्च सबसे सुहाना समय है। माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा सबसे बड़े स्नान-पर्व हैं।
क्या प्रयाग में पिंडदान की व्यवस्था हो सकती है?
हाँ — हम संगम के घाटों पर योग्य पंडित जी की व्यवस्था करते हैं, ज़रूरी सामग्री सहित। पितृ-कर्म के लिए प्रयागराज गया और काशी के साथ उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है।
अगला माघ मेला / कुंभ कब है?
माघ मेला हर वर्ष लगता है (जनवरी-फ़रवरी)। अगला बड़ा अर्ध कुंभ 2031 में है; अगला महाकुंभ 2037 में प्रयागराज में होगा। 2025 के महाकुंभ में 50 करोड़ से अधिक तीर्थयात्री आए थे।
संगम तक नाव से कितना समय लगता है?
संगम घाट से असली मिलन-बिंदु तक जाने-आने में लगभग 30-45 मिनट, पानी के स्तर के अनुसार। मिलन-बिंदु पर नाव रुकती है और वहीं स्नान होता है।
क्या अक्षय वट के दर्शन हो सकते हैं?
हाँ, इलाहाबाद क़िला प्रशासन की विशेष अनुमति से। पूछताछ के समय बता दीजिए, अनुमति की व्यवस्था हम करा देते हैं। दर्शन की अनुमति मौसम के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है।
क्या प्रयागराज को अयोध्या और वाराणसी के साथ जोड़ सकते हैं?
हाँ — साकेत-काशी-प्रयाग यात्रा उत्तर भारत की शास्त्रीय तीर्थयात्राओं में एक है। 5-6 दिनों में तीनों नगर हो जाते हैं। देखिए /tours/saket-kashi-prayag-yatra।
संगम की नाव का भाड़ा कितना है?
नाव का भाड़ा मौसम, नाव के आकार और भीड़ के पर्व-पंचांग से बदलता रहता है — माघ में यह बहुत बढ़ जाता है। हम याददाश्त से नाव के दाम नहीं बताते, और आपको घाट पर मोल-भाव के लिए कभी नहीं छोड़ते। आपकी नाव पैकेज में शामिल होती है और यात्रा से पहले WhatsApp पर लिखित पक्के कोटेशन में तय हो जाती है।
माघ मेला 2027 कब है?
माघ मेला 2027 मकर संक्रांति (15 जनवरी 2027; कुछ पंचांग स्नान 14 जनवरी को मानते हैं) से महाशिवरात्रि (6 मार्च 2027) तक चलेगा। मुख्य स्नान-पर्व हैं पौष पूर्णिमा (22 जनवरी), मौनी अमावस्या (6 फ़रवरी), बसंत पंचमी (11 फ़रवरी) और माघी पूर्णिमा (20 फ़रवरी)। तिथियाँ पंचांग और मेले की आधिकारिक अधिसूचना से तय होती हैं — बुकिंग से पहले हम इन्हें दोबारा पक्का करते हैं।
कल्पवास क्या है?
कल्पवास पूरे माघ महीने संगम की रेती पर रहने का प्राचीन व्रत है — नदी-तट पर तंबू, रोज़ स्नान, एक समय भोजन, सत्संग और संयम। हर वर्ष माघ मेले में हज़ारों कल्पवासी यह व्रत निभाते हैं। आपके परिवार में कोई कल्पवास करता हो और आप उनसे मिलने जाना चाहें, या ख़ुद कुछ दिन मेले का अनुभव लेना चाहें, तो पूछताछ के समय बता दीजिए — हम उसी के अनुसार योजना बनाएँगे।
बड़े हनुमान मंदिर के दर्शन का समय क्या है?
मंदिर सुबह लगभग 5:00 बजे खुलता है। बंद होने और दोपहर के विश्राम के छपे हुए समय अलग-अलग स्रोतों में अलग मिलते हैं और आरती के पंचांग से बदलते रहते हैं — इसलिए हम आपके दर्शन से पहले मंदिर से समय दोबारा पक्का करते हैं। दर्शन जल्दी हो जाते हैं; विग्रह लेटे हुए हनुमान जी का है, ज़मीन से छह-सात फ़ुट नीचे, इलाहाबाद क़िले के पास।

अपनी प्रयागराज यात्रा शुरू कीजिए
अपनी तिथियाँ बताइए — कुछ ही घंटों में हम साफ़-सुथरी यात्रा-योजना, नाव की बुकिंग और पंडित जी की व्यवस्था भेज देंगे।
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बुकिंग और भुगतान
यह कैसे होता है
कोई छिपी बात नहीं। आपके पहले संदेश से यात्रा के दिन तक ठीक-ठीक यही होता है।
- 1
अपनी तारीखें बताएँ
WhatsApp, फोन या पूछताछ फॉर्म से तारीखें, यात्रियों की संख्या और पसंद बताएँ। अभी कोई बंधन नहीं।
- 2
यात्रा-कार्यक्रम और कोटेशन पाएँ
हम लिखित यात्रा-कार्यक्रम, समावेश और पक्का कोटेशन भेजते हैं। आप बिना किसी शुल्क के बदलाव या मना कर सकते हैं।
- 3
ऑनलाइन इनवॉइस से भुगतान
भुगतान मानक इनवॉइस और डिजिटल माध्यमों (UPI, कार्ड, नेट-बैंकिंग) से होता है।
- 4
पुष्टि और सहायता
पुष्टि ईमेल में आपकी बुकिंग, संपर्क और पिकअप समय होते हैं। रिफंड, यदि लागू हो, हमारी प्रकाशित नीतिके अनुसार होता है।


