
अपनी साकेत–काशी–प्रयाग यात्रा की योजना बनाइए
उत्तर भारत की पारंपरिक यात्रा-त्रयी: अयोध्या (श्री राम), वाराणसी (महादेव) और प्रयागराज (त्रिवेणी)। तीन पावन नगरियाँ, एक अखंड तीर्थयात्रा।
उत्तर प्रदेश · साकेत–काशी–प्रयाग · त्रिवेणी
यात्रा-त्रिकोण
साकेत–काशी–प्रयाग यात्रा क्या है?
यह उत्तर भारत की पारंपरिक तीर्थ-त्रयी है। <em>साकेत</em> यानी अयोध्या — श्री राम की जन्मभूमि और सात मोक्षपुरियों में से एक। <em>काशी</em> यानी वाराणसी — महादेव का अविमुक्त क्षेत्र, मोक्ष की नगरी। <em>प्रयाग</em> यानी प्रयागराज — तीर्थराज, त्रिवेणी संगम पर सब तीर्थों का राजा। इन तीनों के दर्शन एक ही यात्रा में करना — विष्णु, शिव और त्रिवेणी की धाराओं को एक साथ प्रणाम करना है। सामान्य यात्रा 5-6 दिन की होती है; चित्रकूट या नैमिषारण्य जोड़ने पर 7-10 दिन की।
अयोध्या
साकेत
प्रयागराज
तीर्थराज
वाराणसी
काशी
वैकल्पिक
जोड़ सकते हैं
यात्रा-क्रम
एक यात्रा में तीन नगरियाँ
तीन नगरियाँ, तीन स्वरूप। साकेत (अयोध्या) में आप वहाँ खड़े होते हैं जहाँ श्री राम का जन्म हुआ। प्रयाग में आप उस जल में उतरते हैं जहाँ तीन नदियाँ मिलती हैं। काशी में आप महादेव के पास उनकी अपनी नगरी में पहुँचते हैं। हर नगरी आपसे अलग-अलग समय माँगती है, और यात्रा तभी सधती है जब हर शहर को उतना समय मिले जितना उसे चाहिए — न कम, न ज़्यादा।
| शहर | दर्शन किस पर टिका है | कितना समय चाहिए |
|---|---|---|
| अयोध्या (साकेत) | राम जन्मभूमि दर्शन, हनुमान गढ़ी, शाम को राम की पैड़ी पर सरयू आरती | 1–1.5 दिन |
| प्रयागराज (प्रयाग) | त्रिवेणी संगम पर सूर्योदय का स्नान, बड़े हनुमान मंदिर, अक्षयवट | आधे से 1 दिन |
| वाराणसी (काशी) | काशी विश्वनाथ दर्शन, भोर की गंगा नाव-यात्रा, दशाश्वमेध पर गंगा आरती | 2 दिन |
अयोध्या का दर्शन सुबह-शाम की लय में चलता है — दिन में जन्मभूमि और हनुमान गढ़ी, सूर्यास्त पर सरयू आरती। प्रयागराज एक सधा हुआ सूर्योदय है: नाव से संगम तक, स्नान, फिर सड़क पकड़ने से पहले बड़े हनुमान के दर्शन। काशी सबसे अधिक समय माँगती है — मंदिर का क्रम, भोर की नाव, शाम की आरती — और दूसरा दिन देने पर और भी खुलती है। पाँच-छह दिन में तीनों नगरियाँ बिना हड़बड़ी समा जाती हैं।
आना-जाना
मार्ग और व्यवस्था — क्रम, दूरियाँ, समय
यह यात्रा एक ही दिशा में चलती है — पीछे लौटना नहीं पड़ता। पारंपरिक क्रम है अयोध्या → प्रयागराज → काशी: अयोध्या पहुँचिए, दक्षिण की ओर संगम तक चलिए, और काशी में यात्रा पूरी कर वाराणसी से घर की उड़ान लीजिए। पूर्व से आने वाले यात्री बस यही क्रम उलटा चलते हैं। सड़क के हिस्सों में आपका सामान आपके साथ उसी AC गाड़ी में चलता है; दर्शनों के बीच बार-बार सामान बाँधना नहीं पड़ता।
| रास्ता | दूरी | समय |
|---|---|---|
| दिल्ली → अयोध्या | ~630 किमी | वंदे भारत ~8 घंटे 20 मिनट, या अयोध्या एयरपोर्ट (AYJ) तक ~1.5 घंटे की उड़ान |
| अयोध्या → प्रयागराज | ~167 किमी | AC टैक्सी से ~4 घंटे — इस हिस्से में सड़क रेल से तेज़ है |
| प्रयागराज → वाराणसी | ~125 किमी | रेल से 2–3 घंटे, या AC टैक्सी से ~3 घंटे |
| अयोध्या → वाराणसी (सीधे) | रेल से ~188 किमी | वंदे भारत ~2.5 घंटे — उलटे क्रम में यात्रा करने वालों के लिए |
अयोध्या तक हवाई मार्ग (AYJ) से या दिल्ली की वंदे भारत से पहुँचिए; वापसी वाराणसी (VNS) से — जहाँ से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता की सीधी उड़ानें हैं। अयोध्या–प्रयागराज की गाड़ी हम ऐसे समय पर रखते हैं कि आप शाम तक संगम पहुँच जाएँ और अगली सुबह सूर्योदय पर स्नान करें — वही समय, जो परंपरा स्वयं कहती है।
अपनी यात्रा चुनिए
अपना मार्ग चुनिए
3
पावन नगरियाँ
~400 किमी
कुल सफ़र
5-6
सुझाए गए दिन
पूरे वर्ष
यात्रा का मौसम
सभी विकल्प
साकेत–काशी–प्रयाग पैकेज
स्टैंडर्ड 5 दिन, चित्रकूट के साथ विस्तृत, और छोटी 4 दिन की यात्रा के विकल्प।

साकेत-काशी-प्रयाग यात्रा दिल्ली से — 4 दिन

साकेत-काशी-प्रयाग यात्रा — 5 दिन

साकेत-काशी-प्रयाग यात्रा कोलकाता से — 5 दिन

साकेत-काशी-प्रयाग यात्रा — 6 दिन, कम्फ़र्ट (मुंबई से, उड़ान-सहित)

साकेत-काशी-प्रयाग यात्रा प्रीमियम — 6 दिन
सतमार्ग ही क्यों
सतमार्ग आपकी यात्रा का ख़याल कैसे रखता है
तीनों शहरों के दर्शन
हर शहर में होटल
पूरी यात्रा में AC गाड़ी
पूरी यात्रा में साथ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
साकेत–काशी–प्रयाग यात्रा — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सबसे अच्छा क्रम कौन-सा है?
परंपरागत क्रम है साकेत (अयोध्या) → प्रयाग → काशी। लखनऊ या अयोध्या एयरपोर्ट से आने पर यही क्रम भूगोल और भक्ति — दोनों दृष्टि से सधता है। वाराणसी से शुरू करने पर उलटा क्रम — काशी → प्रयाग → अयोध्या — भी सामान्य है।
कम से कम कितने दिन चाहिए?
तीनों नगरियों के साथ न्याय हो, इसके लिए कम से कम 5 दिन रखिए। 4 दिन में हो तो सकता है, पर हड़बड़ी रहती है। 7 दिन हों तो चित्रकूट जोड़कर राम-वनवास का पूरा पथ हो जाता है।
साल का सबसे अच्छा समय?
अक्टूबर से मार्च का मौसम सबसे सुखद रहता है। अयोध्या में राम नवमी (मार्च-अप्रैल), प्रयागराज में मौनी अमावस्या (जनवरी-फरवरी), और वाराणसी में महाशिवरात्रि (फरवरी-मार्च) व दीपावली आस्था के शिखर-पर्व हैं। ये तिथियाँ आपके लिए महत्त्व रखती हों तो उन्हीं के अनुसार योजना बनाइए।
क्या बुज़ुर्ग माता-पिता के साथ यह यात्रा कर सकते हैं?
हाँ — यह यात्रा शरीर पर भारी नहीं है। पूरी यात्रा AC गाड़ी में, हर दर्शन-स्थल के पास होटल, और बुज़ुर्गों के अनुकूल गति की योजना (सफ़र वाले दिनों में सुबह-सुबह की भागदौड़ नहीं)। अधिकांश मंदिरों में व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध है।
क्या चित्रकूट या नैमिषारण्य जोड़ सकते हैं?
हाँ। चित्रकूट प्रयागराज और वाराणसी के बीच 2 दिन जोड़ता है। नैमिषारण्य अयोध्या से पहले, लखनऊ के पास 1-2 दिन। समय हो तो दोनों बहुत सार्थक हैं।
दिल्ली से यह यात्रा कैसे करें?
दिल्ली से अयोध्या की उड़ान लीजिए (AYJ, लगभग 1.5 घंटे) या आनंद विहार से वंदे भारत (लगभग 8 घंटे 20 मिनट)। फिर यात्रा एक ही दिशा में चलती है — अयोध्या, प्रयागराज, काशी — और वापसी वाराणसी (VNS) से, जहाँ से दिल्ली और बड़े शहरों की सीधी उड़ानें हैं। न पीछे लौटना, न कोई रास्ता दोहराना।
कौन-से हिस्से सड़क से और कौन-से रेल से?
अयोध्या से प्रयागराज AC टैक्सी से सबसे अच्छा रहता है — लगभग 167 किमी, 4 घंटे; इस हिस्से में सड़क रेल से बेहतर है। प्रयागराज से वाराणसी लगभग 125 किमी — रेल से 2–3 घंटे या टैक्सी से लगभग 3 घंटे। सड़क के हिस्सों में सामान आपके साथ उसी गाड़ी में चलता है।
क्या तीनों शहरों में दर्शन-पास चाहिए?
अयोध्या: राम जन्मभूमि दर्शन निःशुल्क है; निःशुल्क सुगम दर्शन ई-पास और आरती के पास ट्रस्ट के आधिकारिक पोर्टल से बुक होते हैं — यह बुकिंग हम कर देते हैं। काशी: सामान्य दर्शन निःशुल्क है, और मंदिर ट्रस्ट का सुगम दर्शन टिकट (₹250 प्रति व्यक्ति) तेज़ पंक्ति से ले जाता है; मंगला आरती का टिकट अलग से लगता है। प्रयागराज: संगम स्नान के लिए कोई पास नहीं; क़िले के भीतर अक्षयवट दर्शन के लिए पहले से व्यवस्था और फोटो पहचान-पत्र चाहिए। ये सारी बुकिंग पैकेज का हिस्सा हैं।
सबसे ज़्यादा समय कहाँ दें?
काशी में। अयोध्या 1–1.5 दिन में सध जाती है और प्रयागराज एक सधे हुए सूर्योदय में, पर काशी का क्रम — विश्वनाथ यात्रा, भोर की नाव, शाम की गंगा आरती — खुलकर साँस लेने के लिए दो दिन माँगता है। हमारे 5–6 दिन के कार्यक्रम शहरों को ठीक इसी अनुपात में समय देते हैं।
क्या हर शहर में होटल बदलेगा?
हाँ — हर शहर में एक होटल, हर एक मुख्य दर्शन तक पैदल दूरी देखकर चुना हुआ। चेक-इन का समय ऐसा रखा जाता है कि सफ़र के बाद आपको लॉबी में इंतज़ार न करना पड़े, और सड़क के हिस्सों में सामान गाड़ी में आपके साथ रहता है। पक्का करने से पहले होटलों की पूरी सूची लिखित कोटेशन में भेज देते हैं।

अपनी साकेत–काशी–प्रयाग यात्रा आरंभ कीजिए
हमें अपनी तिथियाँ बताइए — कुछ ही घंटों में साफ़-सुथरा कार्यक्रम, होटल और कोटेशन भेज देंगे।
यात्रा जारी रखें
और यात्राएँ
बुकिंग और भुगतान
यह कैसे होता है
कोई छिपी बात नहीं। आपके पहले संदेश से यात्रा के दिन तक ठीक-ठीक यही होता है।
- 1
अपनी तारीखें बताएँ
WhatsApp, फोन या पूछताछ फॉर्म से तारीखें, यात्रियों की संख्या और पसंद बताएँ। अभी कोई बंधन नहीं।
- 2
यात्रा-कार्यक्रम और कोटेशन पाएँ
हम लिखित यात्रा-कार्यक्रम, समावेश और पक्का कोटेशन भेजते हैं। आप बिना किसी शुल्क के बदलाव या मना कर सकते हैं।
- 3
ऑनलाइन इनवॉइस से भुगतान
भुगतान मानक इनवॉइस और डिजिटल माध्यमों (UPI, कार्ड, नेट-बैंकिंग) से होता है।
- 4
पुष्टि और सहायता
पुष्टि ईमेल में आपकी बुकिंग, संपर्क और पिकअप समय होते हैं। रिफंड, यदि लागू हो, हमारी प्रकाशित नीतिके अनुसार होता है।


