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चार धाम यात्रा पंजीकरण — कदम दर कदम पूरी जानकारी
यात्रा पंजीकरण

चार धाम यात्रा पंजीकरण

हर यात्री का पंजीकरण अनिवार्य है, और पूरी तरह निःशुल्क। उत्तराखंड सरकार के टूरिस्ट केयर पोर्टल पर यह कैसे होता है — कौन से दस्तावेज़ चाहिए, प्रक्रिया क्या है, रास्ते में काउंटर कहाँ मिलेंगे, और वह स्वास्थ्य सलाह जिसे कोई न छोड़े।

उत्तराखंड · टूरिस्ट केयर पोर्टल · निःशुल्क पंजीकरण

हर यात्री के लिए अनिवार्यनिःशुल्क — कोई सरकारी शुल्क नहींआधिकारिक टूरिस्ट केयर पोर्टलहर यात्री, हर धाम की अलग प्रविष्टिस्वास्थ्य सलाह की जानकारी

नियम

पंजीकरण अनिवार्य है — और पूरी तरह निःशुल्क

यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ या बद्रीनाथ के लिए निकलने से पहले आपके समूह के हर यात्री का पंजीकरण उत्तराखंड सरकार के पास होना चाहिए। यह कोई ऐसी औपचारिकता नहीं जिसे कोई टाल दे। राज्य का अपना पोर्टल साफ़ कहता है: "उत्तराखंड सरकार की यात्रा नीति के अनुसार, चार धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरू करने से पहले स्वयं का और अपने वाहन का पंजीकरण कराना आवश्यक है।"

पोर्टल है registrationandtouristcare.uk.gov.in, जिसे उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद चलाती है। पोर्टल की प्रश्नोत्तरी बताती है कि 2014 से यह पंजीकरण अनिवार्य है, और प्रक्रिया पूरी होने पर हर यात्री को यात्रा पंजीकरण पत्र पर एक QR कोड मिलता है।

इसका कोई शुल्क नहीं है। पोर्टल इसे अपने शब्दों में "निःशुल्क प्रक्रिया" कहता है। यदि कोई केवल पंजीकरण करा देने के बदले पैसे माँगे, तो वह पैसा सरकार तक नहीं जा रहा।

यह क्यों है, यह समझ लेना बेहतर है। पोर्टल अपना कारण स्वयं बताता है — इससे यात्रियों की आवाजाही की बेहतर निगरानी और नियंत्रण होता है, जिससे पोर्टल के अनुसार यात्रा सबके लिए अधिक सुरक्षित बनती है। धाम पर QR कोड दिखाने से भोजन, ठहरने और सहायता में भी सुविधा मिलती है।

मंदिरों का प्रबंधन अलग है। केदारनाथ और बद्रीनाथ श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अधीन हैं, जो 1939 के अधिनियम से बनी है — और समिति की अपनी वेबसाइट भी यात्रियों से इसी सरकारी पोर्टल पर यात्रा पंजीकरण पूरा करने को कहती है।

शुरू करने से पहले

पोर्टल खोलने से पहले क्या तैयार रखें

जानकारी सामने हो तो पंजीकरण चंद मिनटों का काम है, और न हो तो घंटों का। पोर्टल यह सब माँगता है:

क्याविवरण
हर यात्री के लिएसरकारी फ़ोटो पहचान पत्र — आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट
संपर्कमोबाइल या फ़ोन नंबर। पोर्टल पर आपका खाता मोबाइल नंबर से ही बनता है।
आपातकालीन संपर्कपोर्टल पर अनिवार्य। हमारा सुझाव है कि ऐसा व्यक्ति दें जो आपके साथ यात्रा पर नहीं जा रहा।
आपकी योजनायात्रा की आरंभ और समाप्ति तिथि, यात्रियों की संख्या, कौन-कौन से धाम, और हर धाम पर पहुँचने की तिथि
अपनी गाड़ी से जा रहे हों तोवाहन का विवरण। निजी या सार्वजनिक वाहन का पंजीकरण भी आवश्यक है, वैकल्पिक नहीं।

दो बातें प्रायः चौंकाती हैं। पहली, हर यात्री का पंजीकरण अलग-अलग होता है — दादी हों, बच्चा हो या चालक, हर एक की अपनी प्रविष्टि, एक-एक करके। दूसरी, हर धाम अलग से, अपनी तिथि के साथ दर्ज होता है। चार धाम की यात्रा एक टिक-मार्क नहीं है; वह एक ही यात्रा के भीतर चार तिथियुक्त प्रविष्टियाँ हैं।

और यह भी कि पंजीकरण आपको स्वयं ही करना ज़रूरी नहीं। पोर्टल स्पष्ट रूप से स्वयं, परिवार या टूर ऑपरेटर द्वारा पंजीकरण की अनुमति देता है — हमारे साथ चलने वाले परिवारों का पंजीकरण हम इसी तरह करते हैं।

क्रम से

टूरिस्ट केयर पोर्टल पर पंजीकरण कैसे करें

पोर्टल आपको तीन चरणों से, इसी क्रम में ले जाता है:

  1. पंजीकरण या लॉगिन। पोर्टल पर REGISTER/LOGIN पर जाएँ। नया उपयोगकर्ता साइन अप करता है; पुराना उपयोगकर्ता पहले से बने मोबाइल नंबर और पासवर्ड से साइन इन करता है।
  2. अपनी यात्रा बनाएँ। आरंभ और समाप्ति तिथि, यात्रियों की संख्या, कौन-कौन से धाम, और हर धाम पर पहुँचने की तिथि दर्ज करें।
  3. यात्रियों को जोड़ें। हर यात्री का पहचान विवरण भरें, और अपनी गाड़ी से जा रहे हों तो वाहन भी जोड़ें। यात्रा पूरी दर्ज हो जाने पर यात्रा पंजीकरण पत्र डाउनलोड करें और साथ रखें।

यही प्रक्रिया आधिकारिक Tourist Care Uttarakhand मोबाइल ऐप पर भी उपलब्ध है, एंड्रॉइड और आईओएस दोनों पर — यदि ब्राउज़र से फ़ोन आसान लगे।

फिर उस पत्र को सँभालकर रखें। PDF सहेजें और एक प्रति छपवा भी लें — गढ़वाल की घाटियों में मोबाइल नेटवर्क पर भरोसा करना ठीक नहीं। हर धाम के प्रवेश द्वार पर सत्यापन काउंटर होते हैं — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब — वहीं आपका QR कोड जाँचा जाता है।

साइट धीमी लगे तो प्रायः यह भीड़ का असर होता है, कोई गड़बड़ी नहीं। पोर्टल की अपनी सलाह है कि कुछ मिनट रुककर फिर प्रयास करें, और बाद में आवेदन का प्रिंट निकाल लें ताकि यह पक्का हो जाए कि वह सुरक्षित दर्ज हो गया है।

रास्ते में

यदि ऑनलाइन पंजीकरण न हो पाया हो

ऑनलाइन ही एकमात्र रास्ता नहीं है। राज्य चार तरीक़ों से पंजीकरण कराता है: वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, भौतिक पंजीकरण केंद्र, और यात्री मित्र — मार्ग पर तैनात सहायक कर्मी, जो उन यात्रियों का पंजीकरण कर देते हैं जिनसे बाक़ी तीन तरीक़े नहीं सधते।

पोर्टल मार्ग पर और धामों पर पंजीकरण केंद्रों की सूची देता है। अब तक प्रकाशित सूचियों में ये स्थान रहे हैं — हरिद्वार (राही होटल और रेलवे स्टेशन), ऋषिकेश (आईएसबीटी और गुरुद्वारा), बड़कोट, धरासू बैंड, जानकी चट्टी, हीना (उत्तरकाशी), रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, गुप्तकाशी, फाटा, सोनप्रयाग, गौरीकुंड, जोशीमठ, गोविंदघाट और पांडुकेश्वर — साथ ही चारों धाम और हेमकुंड साहिब का प्रवेश द्वार। यह सूची हर सीज़न बदलती है, इसलिए किसी एक काउंटर पर भरोसा करने से पहले पोर्टल पर देख लें।

ऑनलाइन पंजीकरण यात्रा सीज़न समाप्त होने से कुछ दिन पहले बंद हो जाता है, पर मौक़े पर होने वाला ऑफ़लाइन पंजीकरण यात्रा के अंतिम दिन तक चलता रहता है। और यदि आप बिना पंजीकरण के निकल भी चुके हों, तो रास्ते में — पोर्टल से या किसी केंद्र पर — धाम पहुँचने से पहले पंजीकरण करा सकते हैं।

यात्रा संबंधी सहायता के लिए राज्य की हेल्पलाइन 1364 है, जो उत्तराखंड के भीतर टोल-फ़्री है, और दूसरे राज्यों से +91 135 1364। मार्ग पर किसी चिकित्सा आपात स्थिति में 108 पर कॉल करें; स्वास्थ्य सलाह में चिकित्सा सहायता के लिए 104 भी दिया गया है।

ऊँचाई और स्वास्थ्य

स्वास्थ्य सलाह — वही हिस्सा जिसे लोग छोड़ देते हैं

चार धाम का हर तीर्थ 2,700 मीटर से ऊपर है। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की सलाह, जो इसी पोर्टल के माध्यम से जारी होती है, मैदानों के अभ्यस्त शरीर के लिए इसका अर्थ सीधे-सीधे बताती है — कड़ाके की ठंड, कम नमी, तीखी पराबैंगनी किरणें, कम वायुदाब और कम ऑक्सीजन।

हर धाम आपसे कितनी चढ़ाई माँगता है:

धामऊँचाईअंतिम चरण
यमुनोत्री3,293 मीजानकी चट्टी से 6 किमी की पैदल चढ़ाई, जहाँ तक सड़क जाती है — लगभग 2–3 घंटे
गंगोत्री3,100 मीमोटर सड़क से सीधी पहुँच — कोई पैदल चढ़ाई नहीं
केदारनाथ3,580 मीगौरीकुंड से 16 किमी की चढ़ाई — लगभग 6–8 घंटे। घोड़ा और पिट्ठू सेवा उपलब्ध रहती है।
बद्रीनाथ3,133 मीसड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा — कोई पैदल चढ़ाई नहीं

सलाह का सूत्र है योजना, तैयारी, सामान (Plan, Prepare, Pack):

  • योजना — यात्रा के लिए कम से कम सात दिन रखें ताकि शरीर ऊँचाई का अभ्यस्त हो सके, और हर एक घंटे की पैदल चढ़ाई या हर दो घंटे की सड़क चढ़ाई के बाद 5–10 मिनट रुकें।
  • तैयारी — यात्रा से पहले के हफ़्तों में रोज़ 20–30 मिनट टहलें और 5–10 मिनट श्वास अभ्यास करें। यदि आयु 55 से अधिक है, या हृदय रोग, दमा, उच्च रक्तचाप या मधुमेह है, तो पहले स्वास्थ्य जाँच करवाकर यात्रा के लिए उपयुक्तता निश्चित करें।
  • सामान — ऊनी कपड़े, थर्मल, दस्ताने और मोज़े, बरसाती, और पल्स ऑक्सीमीटर तथा थर्मामीटर। अपनी नियमित दवाएँ, जाँच के उपकरण और अपने डॉक्टर का फ़ोन नंबर साथ रखें।

मार्ग पर, यदि किसी को सीने में दर्द हो, साँस इतनी फूले कि बोलना कठिन हो, लगातार खाँसी आए, चक्कर या भ्रम हो, उल्टी हो, त्वचा ठंडी पड़ जाए, या शरीर के एक तरफ़ कमज़ोरी लगे — तो तुरंत निकटतम चिकित्सा राहत चौकी, स्वास्थ्य केंद्र या स्क्रीनिंग कियोस्क तक पहुँचें। सलाह यह भी कहती है कि दिन में कम से कम दो लीटर तरल लें, और पूरी यात्रा में शराब, कैफ़ीन वाले पेय, नींद की गोलियाँ, तेज़ दर्दनिवारक और धूम्रपान से दूर रहें।

और एक वाक्य जो ज़िद करते बुज़ुर्ग को दोहराकर कहना चाहिए: यदि आपके डॉक्टर ने मना किया है तो यात्रा न करें। यदि पूरी परिक्रमा भारी लगे, तो छोटी दो धाम यात्रा — केदारनाथ और बद्रीनाथ — अपने आप में एक पूर्ण तीर्थयात्रा है, और इसी कारण हम इसे अक्सर बनाते हैं।

हेली दर्शन

केदारनाथ हेलीकॉप्टर: पहले पंजीकरण, तब बुकिंग

गौरीकुंड से 16 किमी की चढ़ाई ही वह कारण है जिससे अधिकतर परिवार हेलीकॉप्टर के बारे में पूछते हैं। किसी भी ऑपरेटर की वेबसाइट देखने से पहले दो बातें जान लें।

पहली, यात्रा पंजीकरण पहले होना अनिवार्य है। बुकिंग प्रणाली आपका यात्रा पंजीकरण नंबर माँगती है, यानी सरकारी पंजीकरण पूरा हुए बिना हेली टिकट का प्रयास ही नहीं किया जा सकता — कई यात्रियों के लिए ग्रुप आईडी और एक व्यक्ति के लिए उसका व्यक्तिगत पंजीकरण नंबर डाला जाता है।

दूसरी, ऑनलाइन बुकिंग की केवल एक ही वैध जगह है। IRCTC का पोर्टल स्वयं लिखता है: "केवल IRCTC HeliYatra वेबसाइट (heliyatra.irctc.co.in) ही श्री केदारनाथ धाम और श्री हेमकुंड साहिब के लिए ऑनलाइन हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग उपलब्ध कराती है।" IRCTC रेल मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक उपक्रम है। इसके अलावा जो भी वेबसाइट आपको ऑनलाइन केदारनाथ हेली सीट बेचे, वह आधिकारिक माध्यम नहीं है। पोर्टल है heliyatra.irctc.co.in।

बुकिंग की सीमा भी तय है: एक यूज़र आईडी पर अधिकतम दो टिकट, और हर टिकट पर अधिकतम छह यात्री — कुल बारह लोग। इससे बड़े समूह के लिए दूसरी बुकर आईडी बनानी पड़ती है।

सीटें सीमित रहती हैं, और IRCTC अपनी सूचनाओं के अनुसार बुकिंग खोलता, रोकता और फिर से शुरू करता है — उसकी वेबसाइट यात्रियों से नियमित रूप से अद्यतन देखते रहने को कहती है। हम आपसे ऐसी सीट का वादा नहीं करेंगे जो हमारे पास नहीं है। हम इतना ज़रूर करेंगे कि तिथियाँ तय करने से पहले आपको साफ़-साफ़ बता दें कि व्यावहारिक विकल्प क्या हैं।

पूरी यात्रा

मार्ग, ऋतु और सभी पैकेज

यह पृष्ठ काग़ज़ी प्रक्रिया के बारे में है। यात्रा स्वयं — यमुनोत्री से बद्रीनाथ तक का पारंपरिक क्रम, ऋतु, सड़क और हेलीकॉप्टर के कार्यक्रम, और हमारे सारे पैकेज — हमारे चार धाम यात्रा हब पर हैं। यदि चार धाम आपकी तिथियों या परिवार की शक्ति से अधिक हों, तो दो धाम यात्रा में केदारनाथ और बद्रीनाथ आते हैं।

कपाट की तिथियाँ हर वर्ष नए सिरे से तय होती हैं, और तय होते ही पंजीकरण पोर्टल उन्हें हर धाम के लिए प्रकाशित करता है — 2026 के लिए यमुनोत्री और गंगोत्री 19 अप्रैल, केदारनाथ 22 अप्रैल और बद्रीनाथ 23 अप्रैल दर्ज हैं, और यात्रा ऋतु आगे अक्टूबर-नवंबर तक चलती है। किसी सीज़न का पंजीकरण तब खुलता है जब सरकार उस वर्ष की यात्रा आरंभ तिथियाँ घोषित कर देती है। जो तिथियाँ मंदिर समितियों ने घोषित न की हों, उन्हें हम नहीं छापते — व्हाट्सएप पर अपना यात्रा महीना बताइए, हम पोर्टल देखकर बता देंगे कि पक्की घोषणा क्या है।

पूछताछ से यात्रा तक

सतमार्ग आपका पंजीकरण कैसे करता है

  1. 1

    अपने समूह का विवरण भेजिए

    नाम ठीक वैसे जैसे पहचान पत्र पर लिखे हैं, आयु, और यात्रा की तिथियाँ — व्हाट्सएप पर। शुरुआत के लिए इतना ही चाहिए।

  2. 2

    हर यात्री का पंजीकरण हम स्वयं करते हैं

    पोर्टल टूर ऑपरेटर को आपकी ओर से पंजीकरण की अनुमति देता है। हम यात्रा बनाते हैं, हर यात्री और हर धाम की तिथि दर्ज करते हैं, और वाहन जोड़ते हैं। इसका हम कोई शुल्क नहीं लेते — पंजीकरण सरकार की ओर से निःशुल्क है, और हमारी ओर से भी।

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    यात्रा पंजीकरण पत्र आप तक पहुँचते हैं

    यात्रा पंजीकरण पत्र और हर यात्री का QR कोड आपको PDF में मिलता है, साथ में सरल भाषा में स्वास्थ्य सलाह और यह जानकारी कि किस दिन कितना चलना पड़ेगा।

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    काग़ज़ात रास्ते भर हमारे साथ रहते हैं

    छपी हुई प्रतियाँ आपकी गाड़ी और गाइड के पास रहती हैं, ताकि सत्यापन काउंटर पर कोई बिना नेटवर्क वाले फ़ोन में कुछ ढूँढ़ता न रह जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजीकरण को लेकर यात्री जो पूछते हैं

क्या चार धाम पंजीकरण सचमुच अनिवार्य है, या बिना इसके काम चल जाएगा?

अनिवार्य है। उत्तराखंड सरकार ने 2014 से इसे आवश्यक कर रखा है, और हर धाम के प्रवेश द्वार पर सत्यापन काउंटर हैं — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब — जहाँ आपका QR कोड जाँचा जाता है। नियम से आगे बढ़कर देखें तो पोर्टल कहता है कि पंजीकरण से यात्रियों की आवाजाही की बेहतर निगरानी और नियंत्रण होता है, जिससे यात्रा सबके लिए अधिक सुरक्षित बनती है, और QR कोड दिखाने पर रास्ते में भोजन तथा ठहरने की सहायता मिलती है। इसके बिना यात्रा पर न निकलें।

चार धाम यात्रा पंजीकरण का शुल्क कितना है?

कुछ भी नहीं। सरकारी पोर्टल स्पष्ट कहता है कि चार धाम पंजीकरण का कोई शुल्क नहीं है और इसे निःशुल्क प्रक्रिया बताता है। सतमार्ग भी इसका कोई शुल्क नहीं लेता — जब हम आपके समूह का पंजीकरण करते हैं, वह पूरी तरह निःशुल्क होता है। यात्रा पैकेज का ख़र्च इससे बिलकुल अलग है, जो तिथियों, होटल की श्रेणी और समूह के आकार पर निर्भर करता है और आपको हमेशा व्हाट्सएप पर एक तय, लिखित क़ीमत के रूप में मिलता है — कुछ भी देने से पहले।

क्या हर धाम और हर व्यक्ति के लिए अलग पंजीकरण चाहिए?

दोनों के लिए हाँ। हर यात्री की अपनी पहचान के साथ अलग प्रविष्टि होती है, और आप जिस भी धाम जा रहे हैं वह अपनी तिथि के साथ अलग दर्ज होता है। यानी चार धाम जाने वाला चार लोगों का परिवार एक प्रविष्टि नहीं है — वह चार यात्री हैं, हर एक को अपना QR कोड मिलता है, और चार तिथियुक्त धाम-प्रविष्टियाँ। फिर हर धाम के प्रवेश द्वार पर आपका QR कोड दोबारा जाँचा जाता है।

पंजीकरण के लिए कौन-कौन से दस्तावेज़ चाहिए?

हर यात्री का सरकारी फ़ोटो पहचान पत्र — आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट — और एक मोबाइल या फ़ोन नंबर। पोर्टल पर आपातकालीन संपर्क देना अनिवार्य है; हमारा सुझाव है कि ऐसा व्यक्ति दें जो आपके साथ यात्रा पर न जा रहा हो। यदि आप निजी या सार्वजनिक वाहन से आ रहे हैं तो वाहन का विवरण भी पंजीकृत कराना होगा।

हम रास्ते में हैं और पंजीकरण कराना भूल गए। अब क्या करें?

आप यात्रा के दौरान भी पंजीकरण करा सकते हैं — या तो पोर्टल से, या मार्ग पर बने पंजीकरण केंद्र पर। पोर्टल ने हरिद्वार, ऋषिकेश, बड़कोट, जानकी चट्टी, गुप्तकाशी, सोनप्रयाग, गौरीकुंड, जोशीमठ और गोविंदघाट जैसे स्थानों पर तथा धामों पर केंद्रों की सूची दी है; मार्ग पर तैनात यात्री मित्र कर्मी भी मौक़े पर पंजीकरण करा देते हैं। ऑनलाइन पंजीकरण सीज़न समाप्त होने से कुछ दिन पहले बंद हो जाता है, पर ऑफ़लाइन पंजीकरण यात्रा के अंतिम दिन तक चलता है। किसी एक काउंटर पर भरोसा करने से पहले उस सीज़न की सूची पोर्टल पर देख लें।

क्या सतमार्ग हमारी ओर से पंजीकरण कर देगा, और उसका शुल्क लेगा?

पहले का उत्तर हाँ, दूसरे का नहीं। पोर्टल स्वयं, परिवार या टूर ऑपरेटर द्वारा पंजीकरण की अनुमति देता है, इसलिए हम आपकी ओर से पंजीकरण कर देते हैं — और इसका एक रुपया भी नहीं लेते। व्हाट्सएप पर नाम ठीक वैसे भेजिए जैसे पहचान पत्र पर हैं, साथ में आयु और तिथियाँ; हर यात्री का पंजीकरण पत्र और QR कोड हम आपको PDF में लौटा देंगे।

सीज़न का पंजीकरण कब खुलता है?

पंजीकरण तब खुलता है जब राज्य उस वर्ष की यात्रा आरंभ तिथियाँ घोषित कर देता है, और वे उस वर्ष की कपाट खुलने की तारीख़ों से जुड़ी होती हैं। पोर्टल ये तिथियाँ हर धाम के लिए प्रकाशित करता है — 2026 के लिए यमुनोत्री और गंगोत्री 19 अप्रैल, केदारनाथ 22 अप्रैल और बद्रीनाथ 23 अप्रैल — और यात्रा ऋतु आगे अक्टूबर-नवंबर तक चलती है। तिथियाँ हर साल बदलती हैं, इसलिए मंदिर समितियों की घोषणा से पहले हम उन्हें नहीं छापते — अपना यात्रा महीना भेजिए, हम पोर्टल देखकर बता देंगे कि क्या पक्का है।

मेरे माता-पिता वृद्ध हैं। क्या यह यात्रा उनके लिए संभव है?

सच कहें तो यह धाम पर और उनके स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। गंगोत्री तक मोटर सड़क से सीधी पहुँच है और बद्रीनाथ सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है — दोनों में पैदल चढ़ाई नहीं है। यमुनोत्री के लिए जानकी चट्टी से 6 किमी की चढ़ाई है, और केदारनाथ के लिए गौरीकुंड से 16 किमी की, जिसमें लगभग छह से आठ घंटे लगते हैं — घोड़ा और पिट्ठू सेवा उपलब्ध रहती है। हर तीर्थ 2,700 मीटर से ऊपर है। राज्य की स्वास्थ्य सलाह कहती है कि 55 से अधिक आयु वाले, या हृदय रोग, दमा, उच्च रक्तचाप या मधुमेह से ग्रस्त यात्री पहले स्वास्थ्य जाँच करवाएँ, और साफ़ शब्दों में यह भी कि डॉक्टर मना करे तो यात्रा न करें। उनकी आयु और स्थिति हमें बताइए — हम यात्रा की गति उसी के अनुसार बनाएँगे, या दो धाम का मार्ग सुझाएँगे।

जय बद्री विशाल

पंजीकरण की चिंता हम पर छोड़ दीजिए

अपने समूह का विवरण व्हाट्सएप पर भेजिए। हर यात्री का पंजीकरण सरकारी पोर्टल पर हम निःशुल्क कर देते हैं, और पत्र आपको लौटा देते हैं।

बुकिंग और भुगतान

यह कैसे होता है

कोई छिपी बात नहीं। आपके पहले संदेश से यात्रा के दिन तक ठीक-ठीक यही होता है।

  1. 1

    अपनी तारीखें बताएँ

    WhatsApp, फोन या पूछताछ फॉर्म से तारीखें, यात्रियों की संख्या और पसंद बताएँ। अभी कोई बंधन नहीं।

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    यात्रा-कार्यक्रम और कोटेशन पाएँ

    हम लिखित यात्रा-कार्यक्रम, समावेश और पक्का कोटेशन भेजते हैं। आप बिना किसी शुल्क के बदलाव या मना कर सकते हैं।

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    ऑनलाइन इनवॉइस से भुगतान

    भुगतान मानक इनवॉइस और डिजिटल माध्यमों (UPI, कार्ड, नेट-बैंकिंग) से होता है।

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    पुष्टि और सहायता

    पुष्टि ईमेल में आपकी बुकिंग, संपर्क और पिकअप समय होते हैं। रिफंड, यदि लागू हो, हमारी प्रकाशित नीतिके अनुसार होता है।

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