
अपनी दो धाम यात्रा की योजना बनाइए
केदारनाथ और बद्रीनाथ — उत्तराखंड के दो प्रमुख हिमालयी धाम। जिन परिवारों के लिए पूरी चार धाम यात्रा संभव नहीं, उनके लिए छोटी यात्रा — शिव और विष्णु के पर्वत-धामों में उतने ही गहरे दर्शन के साथ।
उत्तराखंड · गढ़वाल हिमालय · दो धाम
छोटी तीर्थयात्रा
दो धाम यात्रा क्या है?
उत्तराखंड की दो धाम यात्रा में हिमालय के दो प्रमुख धामों — केदारनाथ और बद्रीनाथ — के दर्शन होते हैं; पूरी चार धाम यात्रा के यमुनोत्री और गंगोत्री वाले चरण इसमें नहीं जुड़ते। जिन परिवारों के पास लगभग एक सप्ताह का ही समय है, जो बुज़ुर्ग नदियों के उद्गम पर बसे ऊँचे मंदिरों तक की चढ़ाई नहीं कर सकते, और जो यात्री लंबे मार्ग के बिना शिव और विष्णु के पर्वत-धामों में गहरे दर्शन चाहते हैं — उनके लिए यही स्वाभाविक चुनाव है। दोनों धामों के कपाट अक्षय तृतीया पर खुलते हैं और दीपावली के आसपास बंद होते हैं; यात्रा मई से अक्टूबर तक चलती है।
केदारनाथ
शिव का ज्योतिर्लिंग
बद्रीनाथ
विष्णु का पर्वत-धाम
चलने से पहले जान लीजिए
केदारनाथ और बद्रीनाथ — 2026 सीज़न की ज़रूरी बातें
दो धाम यात्रा में केदारनाथ — मंदाकिनी घाटी का ज्योतिर्लिंग — और बद्रीनारायण रूप में विष्णु के धाम बद्रीनाथ के दर्शन एक साथ होते हैं। 2026 में केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ के 23 अप्रैल को खुले; दोनों धाम सर्दियों के लिए दीपावली और भाई दूज (मध्य नवंबर) के आसपास बंद होते हैं — सटीक तिथियाँ मंदिर समितियाँ विजयादशमी के आसपास घोषित करती हैं।
| धाम | ऊँचाई | पहुँच | 2026 सीज़न |
|---|---|---|---|
| केदारनाथ | 3,583 मीटर | गौरीकुंड से 16–18 किमी पैदल; घोड़ा, पालकी या हेलीकॉप्टर | 22 अप्रैल – भाई दूज के आसपास (संभावित 11 नवंबर) |
| बद्रीनाथ | 3,300 मीटर | सड़क मंदिर तक जाती है | 23 अप्रैल – मध्य नवंबर (संभावित 13 नवंबर) |
पंजीकरण दोनों धामों के लिए अनिवार्य है — निःशुल्क, उत्तराखंड सरकार के पोर्टल registrationandtouristcare.uk.gov.in पर, जो एकमात्र आधिकारिक साइट है। जिन धामों के दर्शन करने हैं, उन्हीं के लिए पंजीकरण कराइए; जो QR कोड मिलता है, वह मार्ग की चौकियों पर जाँचा जाता है।
ऊँचाई और स्वास्थ्य: दोनों मंदिर 3,000 मीटर से ऊपर हैं, जहाँ हवा पतली है और साँस लेने में यह फ़र्क़ साफ़ महसूस होता है। केदारनाथ की चढ़ाई से पहले एक रात गुप्तकाशी या सोनप्रयाग में रुकिए, धीरे-धीरे चलिए, अपनी नियमित दवाएँ साथ रखिए, और हृदय या साँस की कोई बीमारी हो तो यात्रा से पहले डॉक्टर से सलाह ले लीजिए। केदारनाथ मार्ग पर जगह-जगह चिकित्सा सहायता चौकियाँ हैं।
कैसे पहुँचें
मार्ग — हरिद्वार से 5 से 6 दिन
यात्रा हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है — दिल्ली से रेल या सड़क मार्ग से 4–6 घंटे; जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (देहरादून) ऋषिकेश से लगभग 35 किमी है। ऋषिकेश के आगे पूरा रास्ता पहाड़ी सड़क है — सुबह जल्दी निकलना होता है, और आगे का कार्यक्रम मौसम तय करता है।
| चरण | दूरी | टिप्पणी |
|---|---|---|
| हरिद्वार → गुप्तकाशी / सोनप्रयाग | ~210–230 किमी, 8–9 घंटे | चढ़ाई से पहले रात्रि विश्राम |
| सोनप्रयाग → गौरीकुंड → केदारनाथ | शटल, फिर 16–18 किमी पैदल | घोड़ा, पालकी या हेलीकॉप्टर के विकल्प; रात केदारनाथ में या उसी दिन वापसी |
| गुप्तकाशी → बद्रीनाथ | ~190 किमी, जोशीमठ होते हुए | गेट-प्रणाली वाला पहाड़ी राजमार्ग |
| बद्रीनाथ → ऋषिकेश | ~295 किमी | वापसी का दिन |
केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर: फाटा, सिरसी और गुप्तकाशी से शटल उड़ानें केवल heliyatra.irctc.co.in पर बुक होती हैं — IRCTC का आधिकारिक हेलीयात्रा पोर्टल। कोई अधिकृत एजेंट नहीं है; केदारनाथ के हेली टिकट बेचने वाला कोई और मिले तो समझिए धोखा है। बुकिंग से पहले यात्रा पंजीकरण पूरा होना ज़रूरी है, और मौसम बिगड़ने पर उड़ानें रद्द हो जाती हैं — सड़क का विकल्प तैयार रखिए।
सड़क मार्ग से पाँच-छह दिनों में दोनों धामों के दर्शन तीर्थयात्री की गति से हो जाते हैं। हेलीकॉप्टर से केदारनाथ का समय घट सकता है, पर हिमालय में चाल तो पहाड़ ही तय करता है।
अपनी यात्रा खोजिए
अपना दो धाम मार्ग चुनिए
कई बजट में हेलीकॉप्टर और सड़क पैकेज। हर पैकेज में उत्तराखंड पंजीकरण, होटल और AC गाड़ी शामिल हैं।
2
पावन धाम
3,583m
केदारनाथ की ऊँचाई
6–7
सड़क मार्ग से दिन
2–3
हेलीकॉप्टर से दिन
सभी विकल्प
दो धाम पैकेज
हरिद्वार और देहरादून से हेलीकॉप्टर, सड़क और मिश्रित संयोजन।
सतमार्ग ही क्यों
आपकी दो धाम यात्रा में Satmarg का साथ
पंजीकरण हम कराते हैं
पहाड़ी क्षेत्र में ठहरना
AC गाड़ियाँ, पहाड़ के जानकार चालक
पूरी यात्रा में साथ
पूछताछ से यात्रा तक
पूछताछ से यात्रा तक
- 1
1. अपनी तिथियाँ और पसंद बताइए
यात्रा का महीना, यात्रियों की संख्या, हेलीकॉप्टर या सड़क या मिश्रित। WhatsApp, फ़ोन या पूछताछ फ़ॉर्म से।
- 2
2. यात्रा-कार्यक्रम और कोटेशन
दिन-प्रतिदिन का यात्रा-कार्यक्रम, होटल, गाड़ियाँ, हेलीकॉप्टर स्लॉट (यदि हों), क्या-क्या शामिल है। जितना चाहें बदलवाइए। तय दाम, कोई छिपा खर्च नहीं।
- 3
3. पंजीकरण और बुकिंग
हम उत्तराखंड पंजीकरण कराते हैं, हेलीकॉप्टर स्लॉट (यदि लागू हो) पक्के करते हैं, और होटल व गाड़ियाँ कन्फ़र्म करते हैं।
- 4
4. यात्रा में हम साथ हैं
सारी बुकिंग, चालकों और आपातकालीन संपर्कों के साथ कन्फ़र्मेशन पैक। पूरी यात्रा के दौरान हम संपर्क में रहते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दो धाम यात्रा — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दो धाम यात्रा क्या है?
दो धाम यात्रा उत्तराखंड की छोटी तीर्थयात्रा है, जिसमें चार में से केवल दो धामों — केदारनाथ (शिव) और बद्रीनाथ (विष्णु) — के दर्शन होते हैं। इसमें यमुनोत्री और गंगोत्री नहीं जुड़ते, इसलिए यह कम समय वाले परिवारों, नदियों के उद्गम पर बसे ऊँचे मंदिरों तक चढ़ाई न कर पाने वाले बुज़ुर्गों, और दोनों प्रमुख धामों के गहरे दर्शन चाहने वाले यात्रियों के लिए उपयुक्त है।
2026 में दो धाम यात्रा कब खुलेगी?
केदारनाथ और बद्रीनाथ दोनों के कपाट अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में अक्षय तृतीया पर या उसके आसपास खुलते हैं। कपाट बंद होने के दिन अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में दीपावली के आसपास पड़ते हैं। मंदिर समितियाँ हर वर्ष तिथियाँ घोषित करती हैं, तभी हम सटीक तिथियाँ पक्की बता पाते हैं।
क्या हेलीकॉप्टर पैकेज बुज़ुर्ग यात्रियों के लिए सुरक्षित है?
बुज़ुर्ग यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर पैकेज ही सबसे अधिक चुना जाता है, क्योंकि इससे केदारनाथ की 16 किमी की चढ़ाई और बद्रीनाथ तक की लंबी सड़क यात्रा बच जाती है। फिर भी ऊँचाई अपना असर दिखाती है — केदारनाथ 3,583 मीटर पर है और बद्रीनाथ 3,133 मीटर पर। 65 वर्ष से अधिक उम्र के, या हृदय, साँस या रक्तचाप की बीमारी वाले यात्रियों को हम यात्रा से पहले डॉक्टर से फिटनेस जाँच कराने की सलाह देते हैं।
केदारनाथ को ज्योतिर्लिंग क्यों कहते हैं?
केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है — भारत के प्रमुख शिव धाम, जिनमें से हर एक को शिव के अनंत दिव्य प्रकाश का स्वयंभू स्तंभ माना जाता है। केदारनाथ पंच केदार का शीर्ष भी है — गढ़वाल के वे पाँच शिव मंदिर, जिन्हें परंपरा शिव के उस स्वरूप के अंगों से जोड़ती है जिसमें महादेव पांडवों के सामने प्रकट हुए थे।
बद्रीनाथ का तप्त कुंड क्या है?
तप्त कुंड बद्रीनाथ मंदिर के ठीक नीचे का गर्म जलस्रोत है। यात्री दर्शन से पहले इसमें स्नान करते हैं; माना जाता है कि यह गर्म जल अग्निदेव का वरदान है, और परंपरा में इसे विष्णु के सम्मुख जाने से पहले शुद्धि का स्थान कहा गया है। जल का तापमान औसतन लगभग 45°C रहता है — साल भर गर्म, तब भी जब आसपास की पहाड़ी हवा शून्य से नीचे हो।
क्या दो धाम को बढ़ाकर पूरी चार धाम यात्रा बनाई जा सकती है?
हाँ — यमुनोत्री और गंगोत्री जोड़ने पर यही पूरी चार धाम यात्रा बन जाती है। आप चाहें तो इन दोनों के दर्शन किसी और सीज़न में अलग से भी कर सकते हैं। पूरी चार धाम यात्रा का विवरण /tours/char-dham-yatra पृष्ठ पर है।
कौन-से कपड़े साथ रखने चाहिए?
गर्म ऊनी कपड़े (केदारनाथ में गर्मियों में भी तापमान 5°C से नीचे चला जाता है), बारिश से बचाव का इंतज़ाम, चलने के मज़बूत जूते, ज़रूरी दवाएँ, टॉर्च, सनस्क्रीन, धूप का चश्मा और निजी उपयोग का सामान। सीतापुर और जोशीमठ से ऊपर ATM और मोबाइल नेटवर्क का भरोसा नहीं — नक़द साथ रखिए।
क्या बद्रीनाथ में पिंडदान हो सकता है?
हाँ — बद्रीनाथ का ब्रह्म कपाल उत्तर भारत में पिंडदान और पितृ-कर्म के लिए सबसे पूजनीय स्थानों में से एक है। परंपरा है कि ब्रह्म कपाल पर किया गया पिंडदान पितरों को पितृ-ऋण के चक्र से मुक्त करता है। पूछताछ के समय बता दें तो हम योग्य पंडित जी और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था कर देते हैं।
क्या दो धाम के लिए भी पंजीकरण अनिवार्य है, और कैसे होगा?
हाँ — उत्तराखंड सरकार हर यात्री का पंजीकरण अनिवार्य करती है, दो धामों के लिए भी। यह registrationandtouristcare.uk.gov.in पर निःशुल्क होता है, जो एकमात्र आधिकारिक पोर्टल है; केदारनाथ और बद्रीनाथ चुनिए, पहचान पत्र और यात्रा की तिथियाँ भरिए, और जो QR कोड मिले उसे साथ रखिए — मार्ग की चौकियों पर उसकी जाँच होती है। 2026 सीज़न का पंजीकरण 6 मार्च 2026 से खुला। प्रस्थान से पहले हम हर यात्री को पूरी प्रक्रिया समझा देते हैं।
पूरी चार धाम की जगह दो धाम किसे चुनना चाहिए?
जिनके पास पूरी चार धाम यात्रा के नौ से बारह दिनों की जगह पाँच-छह दिन ही हैं; जो बुज़ुर्ग यात्री कम लंबे सफ़र में दोनों प्रमुख धामों के दर्शन चाहते हैं; और जो पहले छूटा दर्शन पूरा करने लौट रहे हैं। केदारनाथ और बद्रीनाथ मिलकर हरि–हर दर्शन देते हैं — ज्योतिर्लिंग रूप में शिव, बद्रीनारायण रूप में विष्णु — इसीलिए यही जोड़ी इस यात्रा का पारंपरिक छोटा रूप मानी जाती है।
कौन-से महीने सबसे अच्छे हैं, और क्या मानसून में यात्रा सुरक्षित है?
मई–जून और सितंबर–अक्टूबर सबसे अच्छे समय हैं। जुलाई और अगस्त मानसून के महीने हैं — इन राजमार्गों पर भूस्खलन और रास्ता बंद होने का ख़तरा सचमुच रहता है, इसलिए हम तब यात्रा न करने की सलाह देते हैं। 2026 का सीज़न अप्रैल के अंत से मध्य नवंबर तक चलता है और कपाट दीपावली-भाई दूज के आसपास बंद होते हैं; सीज़न के अंत में जाने वाले यात्री कपाट बंद होने की तिथियाँ दोबारा पक्की कर लें — ये विजयादशमी के आसपास घोषित होती हैं।

अपनी दो धाम यात्रा आरंभ कीजिए
बस अपनी यात्रा का महीना बताइए — कुछ ही घंटों में हम साफ़-सुथरा यात्रा-कार्यक्रम, दाम और पंजीकरण की योजना भेज देंगे।
यात्रा जारी रखें
और यात्राएँ
बुकिंग और भुगतान
यह कैसे होता है
कोई छिपी बात नहीं। आपके पहले संदेश से यात्रा के दिन तक ठीक-ठीक यही होता है।
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अपनी तारीखें बताएँ
WhatsApp, फोन या पूछताछ फॉर्म से तारीखें, यात्रियों की संख्या और पसंद बताएँ। अभी कोई बंधन नहीं।
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यात्रा-कार्यक्रम और कोटेशन पाएँ
हम लिखित यात्रा-कार्यक्रम, समावेश और पक्का कोटेशन भेजते हैं। आप बिना किसी शुल्क के बदलाव या मना कर सकते हैं।
- 3
ऑनलाइन इनवॉइस से भुगतान
भुगतान मानक इनवॉइस और डिजिटल माध्यमों (UPI, कार्ड, नेट-बैंकिंग) से होता है।
- 4
पुष्टि और सहायता
पुष्टि ईमेल में आपकी बुकिंग, संपर्क और पिकअप समय होते हैं। रिफंड, यदि लागू हो, हमारी प्रकाशित नीतिके अनुसार होता है।



