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काशी पर्व-कैलेंडर — वाराणसी के पावन दिन
काशी के पर्व

काशी का पर्व-कैलेंडर — एक नगरी, जो हर तिथि को जीती है

काशी में पर्वों का कोई एक मौसम नहीं होता — यहाँ पूरा वर्ष ही पर्व का है। ये वे दिन हैं जिनके लिए यह नगरी जीती है — 2026–27 की जाँची हुई तिथियों के साथ, और इस सच्ची बात के साथ कि हर पर्व के लिए कितने पहले से तैयारी चाहिए।

2026–27 की तिथियाँ · पंचांग से जाँची हुईं

तिथि के हिसाब से दर्शन की योजनानाव और घाट की व्यवस्थापर्व के दिन साथ चलने वाला स्थानीय साथीपर्व-सप्ताह के होटललिखित में तय दाम

कैलेंडर

काशी का पूरा वर्ष — 2026–27 की जाँची हुई तिथियाँ

काशी में तीर्थयात्री का वर्ष छह पर्वों से बनता है। नीचे की तिथियाँ पंचांग से जाँची गई हैं — इधर-उधर की सूचियों से उतारी नहीं गईं — और जिस पर्व का हमारा विस्तृत पन्ना है, वहाँ उसकी कड़ी दी गई है।

पर्वतिथि (2026–27)उस दिन का महत्व
सावन (श्रावण)गुरुवार 30 जुलाई – शुक्रवार 28 अगस्त 2026
सोमवार: 3, 10, 17, 24 अगस्त
वह महीना जो शिव का है — सोमवार के दर्शन, रुद्राभिषेक, काँवर का मौसम
अन्नपूर्णा का अन्नकूटमंगलवार, 10 नवम्बर 2026
(कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)
काशी विश्वनाथ के पास अन्नपूर्णा मंदिर में अन्नकूट सजता है — देवी के सामने छप्पन भोग, और उनके स्वर्ण विग्रह के दुर्लभ दर्शन — जो केवल धनतेरस से अन्नकूट तक के कुछ दिनों में ही होते हैं
देव दीपावली (कार्तिक पूर्णिमा)मंगलवार, 24 नवम्बर 2026हर घाट पर लाखों दीये — परंपरा है कि इस रात देवता स्वयं गंगा-स्नान को उतरते हैं — नदी पर काशी की सबसे बड़ी रात
मकर संक्रांति (खिचड़ी)शुक्रवार, 15 जनवरी 2027उत्तरायण का आरंभ — भोर का गंगा-स्नान, खिचड़ी और तिल-दान; संक्रांति 14 की रात 9 बजे के बाद लगती है, इसलिए स्नान 15 को होता है
महाशिवरात्रिशनिवार, 6 मार्च 2027
(निशिता पूजा मध्यरात्रि के बाद)
शिव की महारात्रि — पूरी नगरी जागती है, चार प्रहर की पूजा, वर्ष के सबसे माँगे जाने वाले दर्शनों में से एक
रंगभरी एकादशीगुरुवार, 18 मार्च 2027
(फाल्गुन शुक्ल / आमलकी एकादशी)
बाबा विश्वनाथ माता पार्वती का गौना कराकर उन्हें काशी लाते हैं — मंदिर चौक पर गुलाल उड़ता है, और इसी दिन से काशी में होली शुरू हो जाती है

चंद्र तिथियाँ हर वर्ष पंचांग के साथ बदलती हैं। हम यह पन्ना हर साल नई तिथियों से ठीक करते हैं, और कोई भी बुकिंग लेने से पहले तिथि दोबारा जाँच लेते हैं।

अपना दिन चुनिए

आपका पर्व कौन-सा है?

शिव के लिए: सावन और महाशिवरात्रि शैव वर्ष के दो छोर हैं। सावन आपको पूरा एक महीना देता है — चार सोमवार, और रुद्राभिषेक के लिए सबसे अच्छा समय — जबकि महाशिवरात्रि एक ही रतजगे की रात है, जिसमें कतार में खड़े रहना ही व्रत बन जाता है। महाशिवरात्रि के कुछ दिन बाद रंगभरी एकादशी आती है, जब काशी वह दिन मनाती है जिस दिन बाबा माता पार्वती का गौना कराकर उन्हें घर लाते हैं: मंदिर चौक पर गुलाल उड़ता है, और बाक़ी देश से कई दिन पहले, अकेली काशी में होली शुरू हो जाती है।

गंगा के लिए: देव दीपावली तो नदी का अपना पर्व है — कार्तिक पूर्णिमा की रात हर घाट दीयों से जगमगाता है; इसे नाव से देखना सबसे अच्छा रहता है, पर नाव हफ़्तों पहले तय करनी पड़ती है। मकर संक्रांति उसका शांत, जाड़े वाला रूप है: उत्तरायण के आरंभ पर भोर का स्नान, घाटों पर खिचड़ी और तिल का दान।

अन्नपूर्णा के लिए: अन्नकूट (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) के दिन काशी विश्वनाथ के पास अन्नपूर्णा मंदिर में देवी के सामने छप्पन भोग सजता है, और उनके स्वर्ण विग्रह के दर्शन होते हैं — जो केवल धनतेरस से अन्नकूट तक के कुछ ही दिनों में खुलते हैं। काशी की एक पुरानी सीख इसी जोड़ी में बसी है — विश्वेश्वर मोक्ष देते हैं, अन्नपूर्णा भोजन — और यह बात किसी और दिन इतनी साफ़ नहीं दिखती।

यहाँ के हर पर्व का एक ही सच है: नगरी तिथि से पहले भर जाती है, तिथि पर नहीं। मंदिर के पास के होटल और नदी की नावें इन दिनों से हफ़्तों पहले बुक हो जाती हैं। अगर मन किसी तिथि पर टिक गया है, तो तारीख़ें तय होते ही हमें लिख भेजिए — पहले से बात करने में न कुछ लगता है, न कुछ छूटता है।

पूछताछ से यात्रा तक

Satmarg के साथ पर्व की योजना कैसे बनती है

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    अपनी तिथि चुनिए

    हमें बताइए कौन-सा पर्व आपको बुला रहा है — या बस अपनी यात्रा की तारीख़ें बताइए, हम सच-सच बता देंगे कि उनमें कौन-सा पर्व पड़ता है और भीड़ कैसी रहेगी।

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    हम पंचांग से पुष्टि करते हैं

    चंद्र तिथियाँ हर वर्ष बदलती हैं और वेबसाइटें आपस में मेल नहीं खातीं। कुछ भी बुक होने से पहले हम उस दिन की तिथि और मंदिर की व्यवस्था — दोनों की पुष्टि कर लेते हैं।

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    एक तय, लिखित दाम

    होटल, आना-जाना, दर्शन की योजना, नाव या घाट की व्यवस्था, साथ चलने वाला साथी — सब कुछ WhatsApp पर एक लिखित हिसाब में, पैसे देने से पहले। उस दिन जाकर यह बदलता नहीं।

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    पर्व के दिन एक स्थानीय हाथ

    काशी के पर्व-दिन उन्हीं के लिए आसान होते हैं जो गलियों को जानते हैं। हमारा साथी आपके परिवार के साथ-साथ चलता है — भोर से पहले घाट तक, दर्शन की कतार में, और वापस गाड़ी तक।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काशी के पर्वों के आस-पास योजना

क्या ये तिथियाँ पक्की हैं?

ऊपर की तिथियाँ 2026–27 के पंचांग से जाँची गई हैं: सावन 30 जुलाई–28 अगस्त 2026, अन्नकूट 10 नवम्बर 2026, देव दीपावली 24 नवम्बर 2026, मकर संक्रांति 15 जनवरी 2027, महाशिवरात्रि 6 मार्च 2027, रंगभरी एकादशी 18 मार्च 2027। पंचांग बन जाने के बाद चंद्र तिथियाँ बदलती नहीं, पर हर दिन के लिए मंदिर की व्यवस्था उस तारीख़ के पास आकर घोषित होती है — किसी भी बुकिंग से पहले हम दोनों की दोबारा पुष्टि करते हैं।

सबसे ज़्यादा भीड़ किस पर्व पर होती है?

इन छह में सबसे भारी भीड़ देव दीपावली और महाशिवरात्रि पर होती है; सावन के सोमवार उनके ठीक पीछे हैं। मकर संक्रांति और रंगभरी एकादशी की भीड़ घनी तो होती है, पर थोड़ी देर की। भीड़ दूर रहने का कारण नहीं है — वही तो पर्व है — पर वह होटल और नाव हफ़्तों पहले बुक करने का, और उस दिन एक स्थानीय साथी साथ रखने का कारण ज़रूर है।

पर्व की तिथि के लिए कितने पहले बुकिंग कर लेनी चाहिए?

देव दीपावली के लिए नावें और गंगा की ओर खुलने वाले कमरे हफ़्तों पहले भर जाते हैं — छह से दस हफ़्ते पहले चलना ठीक रहता है। महाशिवरात्रि और सावन के सोमवारों के लिए मंदिर से पैदल दूरी वाले होटल सबसे पहले भरते हैं। शांत दिनों के लिए दो-तीन हफ़्ते पहले भी प्रायः काम बन जाता है। आप जब भी लिखें, हम सच-सच बता देंगे कि उस समय क्या-क्या बचा है।

क्या Satmarg इनमें से किसी भी दिन की हमारी यात्रा की व्यवस्था कर सकता है?

जी हाँ — यही तो हमारा काम है। WhatsApp पर पर्व और परिवार में लोगों की संख्या बताइए, और आपको एक तय लिखित हिसाब मिलेगा — होटल, आना-जाना, दर्शन की योजना, और उस दिन की ज़रूरत के हिसाब से घाट या नाव की व्यवस्था। दाम पैसे देने से पहले लिखित में पक्का हो जाता है।

अगर हमारी तारीख़ें पर्वों के बीच में पड़ें तो?

तो काशी आपको अपना रोज़ वाला रूप दिखाती है — और वह भी कुछ कम नहीं। दर्शन की कतारें हल्की रहती हैं, नावें आराम से मिल जाती हैं, और दशाश्वमेध की संध्या गंगा आरती तो वर्ष की हर एक शाम होती है। काशी यात्रा को किसी पर्व के बहाने की ज़रूरत नहीं।

हर हर महादेव

अपनी पर्व-यात्रा की योजना बनाइए

हमें वह तिथि बताइए जो आपको बुला रही है — हम उसके चारों ओर आपके दिन सजा देंगे।

सभी विकल्प

अपना पैकेज चुनें

सभी पैकेज में AC वाहन और होटल शामिल हैं।

बुकिंग और भुगतान

यह कैसे होता है

कोई छिपी बात नहीं। आपके पहले संदेश से यात्रा के दिन तक ठीक-ठीक यही होता है।

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    अपनी तारीखें बताएँ

    WhatsApp, फोन या पूछताछ फॉर्म से तारीखें, यात्रियों की संख्या और पसंद बताएँ। अभी कोई बंधन नहीं।

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    यात्रा-कार्यक्रम और कोटेशन पाएँ

    हम लिखित यात्रा-कार्यक्रम, समावेश और पक्का कोटेशन भेजते हैं। आप बिना किसी शुल्क के बदलाव या मना कर सकते हैं।

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    ऑनलाइन इनवॉइस से भुगतान

    भुगतान मानक इनवॉइस और डिजिटल माध्यमों (UPI, कार्ड, नेट-बैंकिंग) से होता है।

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    पुष्टि और सहायता

    पुष्टि ईमेल में आपकी बुकिंग, संपर्क और पिकअप समय होते हैं। रिफंड, यदि लागू हो, हमारी प्रकाशित नीतिके अनुसार होता है।

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