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काशी में सत्यनारायण कथा
ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः

काशी में सत्यनारायण कथा,
कृतज्ञता और शुभ आरंभ के लिए

भगवान सत्यनारायण की प्यारी कथा, विद्वान पंडित के मुख से पूरी — आपके होटल में या किसी निजी स्थान पर, सारी व्यवस्था के साथ।

पूर्णिमा · गृह प्रवेश · विवाह-वर्षगाँठ · कृतज्ञता

काशी के विद्वान पंडितपाँचों अध्यायों की पूरी कथासामग्री और प्रसाद साथआपके होटल में या निजी स्थान परतय दाम, लिखित में

परंपरा

सत्यनारायण कथा में क्या-क्या होता है

सत्यनारायण कथा हिंदू परंपरा की सबसे प्यारी घरेलू पूजा है — भगवान सत्यनारायण की आराधना, सत्य-स्वरूप विष्णु की, और उसके बाद स्कंद पुराण से कथा का पाठ, पूरे पाँच अध्यायों में। हर अध्याय उनकी कहानी कहता है जिन्होंने पूजा का संकल्प लिया, वचन भुलाया या निभाया, और फिर क्या हुआ — बनिया, लकड़हारा, राजा — और परिवार अंत तक साथ बैठकर सुनता है, क्योंकि कथा तभी पूरी मानी जाती है जब पूरी सुनी जाए।

परिवार इसे काशी में उन्हीं अवसरों पर करवाते हैं जिनके लिए यह सदा से होती आई है: पूर्णिमा का दिन, नया घर, विवाह या वर्षगाँठ, किसी काम का शुभारंभ, या पूरी हुई मनोकामना के लिए सीधी-सच्ची कृतज्ञता। विधि गणेश पूजा और कलश स्थापना से आरंभ होती है, पंचामृत के साथ सत्यनारायण भगवान की पूजा से होते हुए आरती और प्रसाद पर पूरी होती है — रिवाज के अनुसार पंजीरी, भुने गेहूँ के आटे की, या केले और तुलसी के साथ हलवा (शीरा)। पूरा आयोजन लगभग दो से तीन घंटे का होता है।

पंडित, पूरी सामग्री और प्रसाद — सबकी व्यवस्था हम करते हैं, आपके होटल के कमरे में, घाटों के पास किसी निजी स्थान पर, या परिवार के घर में। पंडित कथा बिना घटाए पूरी पढ़ते हैं और साथ-साथ समझाते भी जाते हैं, हिंदी में या आपकी भाषा में — ताकि बच्चे ये कहानियाँ वैसे ही सुनें जैसे उनके दादा-दादी ने सुनी थीं।

पूछताछ से यात्रा तक

व्यवस्था ऐसे होती है

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    अवसर चुनिए

    अपनी तिथि और कथा का प्रयोजन बताइए — पूर्णिमा के दिन पहले भर जाते हैं, इसलिए कुछ दिन पहले बता देना अच्छा रहता है।

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    एक लिखित कोटेशन

    हम पंडित, स्थान, सामग्री की सूची (सब हम ही लाते हैं) और एक तय लिखित दाम पक्का कर देते हैं। उस दिन कुछ भी जोड़ा नहीं जाता।

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    कथा

    पंडित सब कुछ लेकर पहुँचते हैं, चौकी और कलश सजाते हैं, और दंपती या परिवार यजमान बनकर बैठता है। पूजा, पाँचों अध्याय, आरती, प्रसाद — लगभग दो से तीन घंटे, बिना हड़बड़ी।

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    प्रसाद और दर्शन

    उपस्थित सभी में प्रसाद बँटता है। अधिकांश परिवार इसके बाद काशी विश्वनाथ दर्शन या संध्या की गंगा आरती रखते हैं — उसी यात्रा में दोनों की व्यवस्था हम कर देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सत्यनारायण कथा के लिए सबसे अच्छा दिन कौन-सा है?

पूर्णिमा — पूरे चाँद का दिन — कथा से सबसे अधिक जुड़ा है, और कार्तिक, वैशाख व श्रावण की पूर्णिमाएँ विशेष प्रिय मानी जाती हैं। पर कथा वर्ष भर होती है: वर्षगाँठ पर, किसी नए काम से पहले, या किसी भी दिन जब परिवार शुद्ध मन से एक साथ बैठे। आपके पंडित अवसर के अनुकूल मुहूर्त सुझा सकते हैं।

क्या कथा होटल के कमरे में हो सकती है?

हाँ — एक साफ़, शांत कमरा पूरी तरह पर्याप्त है, और बाहर से आए अधिकांश परिवार ऐसे ही करते हैं। पंडित चौकी, कलश और पूजा की सारी सामग्री साथ लाते हैं; बस एक कोना साफ़ रखा हो। चाहें तो घाटों के पास किसी निजी स्थान की व्यवस्था भी हम कर देते हैं।

कितना समय लगता है, और क्या सब सम्मिलित हो सकते हैं?

गणेश पूजा से प्रसाद तक लगभग दो से तीन घंटे। दंपती — या परिवार का कोई एक सदस्य — यजमान बनकर पंडित के निर्देश में पूजा करता है, और बाक़ी सब, बच्चों समेत, बैठकर कथा सुनते हैं। कथा को पूरा सुन लेना अपने आप में व्रत में सम्मिलित होना माना जाता है।

इसमें क्या-क्या सम्मिलित है?

पंडित, पूरी सामग्री — कलश, चौकी का वस्त्र, फूल, फल, पंचामृत, और जहाँ स्थान अनुमति दे वहाँ हवन की सामग्री — और प्रसाद, रिवाज के अनुसार ताज़ी बनी पंजीरी या हलवा। आपको अपने सिवा कुछ नहीं लाना; हो सके तो पारंपरिक वस्त्रों में आइए।

ख़र्च कितना आता है?

सत्यनारायण कथा एक सादा आयोजन है, और इसका ख़र्च मुख्यतः स्थान पर और हवन जैसी अतिरिक्त विधियों पर निर्भर करता है। पक्का करने से पहले हम WhatsApp पर एक तय लिखित कोटेशन भेजते हैं — पंडित, सामग्री, प्रसाद और दक्षिणा, सब उसमें सम्मिलित; उस दिन कुछ नहीं माँगा जाता।

क्या यह काशी यात्रा का हिस्सा बन सकती है?

हाँ, और यह सहज ही बैठती है — कई परिवार दर्शन के अगली सुबह कथा रखते हैं, स्वयं यात्रा के लिए धन्यवाद-स्वरूप। हमें बता दीजिए कि इसे जोड़ना है, हम इसे यात्रा-क्रम में सही घड़ी पर रख देंगे।

सत्यनारायण भगवान की जय

काशी में सत्यनारायण कथा करवाइए

अवसर और अपनी तिथि बताइए। पंडित, सामग्री और प्रसाद तैयार मिलेंगे।

बुकिंग और भुगतान

यह कैसे होता है

कोई छिपी बात नहीं। आपके पहले संदेश से यात्रा के दिन तक ठीक-ठीक यही होता है।

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    अपनी तारीखें बताएँ

    WhatsApp, फोन या पूछताछ फॉर्म से तारीखें, यात्रियों की संख्या और पसंद बताएँ। अभी कोई बंधन नहीं।

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    यात्रा-कार्यक्रम और कोटेशन पाएँ

    हम लिखित यात्रा-कार्यक्रम, समावेश और पक्का कोटेशन भेजते हैं। आप बिना किसी शुल्क के बदलाव या मना कर सकते हैं।

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    ऑनलाइन इनवॉइस से भुगतान

    भुगतान मानक इनवॉइस और डिजिटल माध्यमों (UPI, कार्ड, नेट-बैंकिंग) से होता है।

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    पुष्टि और सहायता

    पुष्टि ईमेल में आपकी बुकिंग, संपर्क और पिकअप समय होते हैं। रिफंड, यदि लागू हो, हमारी प्रकाशित नीतिके अनुसार होता है।

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