
चार धाम यात्रा पैकेज 2026
यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ — चारों हिमालयी धाम, परंपरा के बताए क्रम में। हेलीकॉप्टर और सड़क, दोनों तरह के पैकेज — रजिस्ट्रेशन, होटल और ऊँचाई का ख़याल रखती योजना के साथ।
उत्तराखंड · गढ़वाल हिमालय · चार धाम
परंपरा
चार धाम यात्रा क्या है?
उत्तराखंड की चार धाम यात्रा गढ़वाल हिमालय के चार पवित्र धामों की ऊँचाई वाली तीर्थयात्रा है। कपाट अक्षय तृतीया पर, अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में खुलते हैं और दीपावली के आसपास सर्दियों के लिए बंद हो जाते हैं। परंपरा है कि यात्रा प्रदक्षिणा के क्रम में, यानी घड़ी की दिशा में की जाती है — पहले यमुनोत्री, फिर गंगोत्री, फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ — करुणा की नदियों से चलकर मोक्ष के धाम तक। माना जाता है कि आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ और केदारनाथ की पूजा का पुनरुद्धार किया, और तभी से ये चारों धाम एक ही पवित्र परिक्रमा के रूप में देखे जाते हैं। (ध्यान दें: आदि शंकराचार्य ने अखिल भारतीय स्तर पर एक अलग चार धाम भी स्थापित किए — बद्रीनाथ, पुरी, रामेश्वरम, द्वारका — जिनकी जानकारी हमारे आदि चार धाम पेज पर है।)
यमुनोत्री
यमुना का उद्गम
गंगोत्री
गंगा का उद्गम
केदारनाथ
ज्योतिर्लिंग
बद्रीनाथ
विष्णु का धाम
चलने से पहले जान लें
चारों धाम — ऊँचाई, पहुँच और 2026 का सीज़न
2026 में चार धाम के कपाट 19 अप्रैल, अक्षय तृतीया को खुले — पहले यमुनोत्री और गंगोत्री, फिर 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ। सर्दियों के लिए कपाट दीपावली और भाई दूज के आसपास (नवंबर 2026 के पहले-दूसरे सप्ताह में) बंद होते हैं; बंद होने की सही तिथियाँ मंदिर समितियाँ विजयादशमी के आसपास घोषित करती हैं, इसलिए सीज़न के आख़िर में जाना हो तो एक बार फिर पक्का कर लें।
| धाम | ऊँचाई | पहुँच | 2026 सीज़न |
|---|---|---|---|
| यमुनोत्री | 3,293 मी | जानकी चट्टी से 5–6 किमी पैदल; घोड़ा-खच्चर और पालकी उपलब्ध | 19 अप्रैल – भाई दूज के आसपास (संभावित 11 नवंबर) |
| गंगोत्री | ~3,100 मी | सड़क मंदिर तक जाती है | 19 अप्रैल – अन्नकूट के आसपास (संभावित 10 नवंबर) |
| केदारनाथ | 3,583 मी | गौरीकुंड से 16–18 किमी पैदल; घोड़ा, पालकी या हेलीकॉप्टर | 22 अप्रैल – भाई दूज के आसपास (संभावित 11 नवंबर) |
| बद्रीनाथ | 3,300 मी | सड़क मंदिर तक जाती है | 23 अप्रैल – नवंबर मध्य (संभावित 13 नवंबर) |
हर यात्री के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। यह निःशुल्क है, उत्तराखंड सरकार के पोर्टल registrationandtouristcare.uk.gov.in पर — यही एकमात्र आधिकारिक साइट है। रजिस्ट्रेशन पर एक QR कोड मिलता है, जो यात्रा मार्गों की चौकियों पर जाँचा जाता है; इसके बिना निकले तो आपको रास्ते से लौटाया जा सकता है।
ऊँचाई और सेहत: केदारनाथ 3,583 मीटर और बद्रीनाथ 3,300 मीटर पर है — इतनी ऊँचाई पर हवा पतली महसूस होने लगती है और साँस जल्दी चढ़ती है। धीरे-धीरे चलें, केदारनाथ की चढ़ाई से पहले एक रात गुप्तकाशी या सोनप्रयाग में रुकें, अपनी रोज़ की दवाइयाँ साथ रखें, और दिल या साँस की कोई तकलीफ़ हो तो यात्रा से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। केदारनाथ के रास्ते पर जगह-जगह मेडिकल राहत चौकियाँ बनी हैं।
परंपरागत क्रम पश्चिम से पूर्व चलता है — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ — और Satmarg की हर यात्रा-योजना इसी क्रम से चलती है।
कैसे पहुँचें
मार्ग — हरिद्वार से बद्रीनाथ, 9–12 दिन में
यात्रा हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। दिल्ली से रेल या सड़क से 4–6 घंटे लगते हैं; जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (देहरादून) ऋषिकेश से लगभग 35 किमी है। ऋषिकेश के आगे पूरा रास्ता पहाड़ी सड़कों का है — सुबह जल्दी निकलना, रोज़ छह से आठ घंटे की ड्राइव, और मौसम ही तय करता है कि दिन कैसा बीतेगा।
| पड़ाव | दूरी | ज़रूरी बात |
|---|---|---|
| हरिद्वार → बड़कोट | ~200 किमी, 7–8 घंटे | रात का पड़ाव; यमुनोत्री का बेस |
| बड़कोट → जानकी चट्टी → यमुनोत्री | सड़क से ~45 किमी | फिर 5–6 किमी की पैदल चढ़ाई, आने-जाने दोनों में |
| बड़कोट → उत्तरकाशी → गंगोत्री | ~170 किमी | सड़क मंदिर के द्वार तक जाती है |
| उत्तरकाशी → गुप्तकाशी / सोनप्रयाग | ~220 किमी | सबसे लंबा ड्राइविंग वाला दिन |
| सोनप्रयाग → गौरीकुंड → केदारनाथ | शटल, फिर 16–18 किमी पैदल | घोड़ा, पालकी या हेलीकॉप्टर के विकल्प |
| गुप्तकाशी → बद्रीनाथ | जोशीमठ होते हुए ~190 किमी | गेट-सिस्टम से चलने वाला पहाड़ी हाईवे |
| बद्रीनाथ → ऋषिकेश | ~295 किमी | वापसी का दिन |
केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर: फाटा, सिरसी और गुप्तकाशी से शटल उड़ानें केवल heliyatra.irctc.co.in पर बुक होती हैं — यही IRCTC HeliYatra का आधिकारिक पोर्टल है। इन टिकटों का कोई अधिकृत एजेंट नहीं है; कहीं और — किसी वेबसाइट, सोशल मीडिया पेज या व्यक्ति से — केदारनाथ हेली सीट बेचने वाले ठगी ही कर रहे हैं। बुकिंग से पहले आपका उत्तराखंड यात्रा रजिस्ट्रेशन पूरा होना ज़रूरी है।
सड़क से चारों धामों के लिए 9–12 दिन रखें। हम हर यात्रा-योजना में कुछ दिन अतिरिक्त जोड़कर चलते हैं — हिमालय में चाल पहाड़ ही तय करता है।
अपनी यात्रा पहचानिए
अपना चार धाम मार्ग चुनिए
चाहे आपके पास कुछ ही दिन हों या पूरा पखवाड़ा — धामों तक पहुँचने के कई रास्ते हैं। हेलीकॉप्टर पैकेज यात्रा को 5–6 दिन में समेट देते हैं; सड़क पैकेज में यात्री परंपरा की रफ़्तार से चलते हैं।
4
पवित्र धाम
3,583 मी
सबसे ऊँचा धाम (केदारनाथ)
मई–अक्टूबर
यात्रा का सीज़न
9–12
सड़क यात्रा के दिन
सभी विकल्प
चार धाम पैकेज
हर बजट में हेलीकॉप्टर और सड़क पैकेज। सभी पैकेजों में उत्तराखंड रजिस्ट्रेशन, होटल और AC गाड़ी शामिल हैं।

चार धाम यात्रा सम्पूर्ण — 11 दिन

चार धाम वात्सल्य — वरिष्ठ-अनुकूल 13 दिन

चार धाम प्रथम — प्रीमियम 12 दिवस

चार धाम हेली दिव्य — 6 दिन

केदारनाथ की एक सुबह
सूरज मंदिर तक पहुँचे, उससे पहले
3,583 मीटर की ऊँचाई पर सुबह की हवा हल्की और एकदम साफ़ होती है। अँधेरा रहते ही यात्री अपने गेस्टहाउस में जाग जाते हैं और ऊनी कपड़ों पर कंबल लपेटे मंदिर तक की छोटी पत्थर की राह पर चल पड़ते हैं। भैरवनाथ आरती अभी-अभी पूरी हुई है; पुजारी महाभिषेक की तैयारी में लगे हैं।
जब पहली किरण मंदिर के ऊपर की बर्फ़ को छूती है, तब तक क़तार लग चुकी होती है। भीतर केदारेश्वर के ज्योतिर्लिंग पर गंगाजल, घी और बेलपत्र चढ़ रहे हैं। पीछे खड़े यात्रियों से ॐ नमः शिवाय का स्वर धीमे-धीमे उठता है। बाहर महापंथ की ओर से आई पहली हवा में ध्वजाएँ लहरा उठती हैं।
चार धाम का असली मर्म यही है — न हेलीकॉप्टर, न हेलीपैड, न चढ़ाई। वह क्षण, जब ठंड और चढ़ाई पीछे छूट जाती है और यात्री उस लिंग के सामने खड़ा होता है जो इस घाटी में तब से विराजमान है जब से हिंदू परंपरा इसे याद रखती आई है।
सतमार्ग ही क्यों
Satmarg आपकी चार धाम यात्रा में कैसे साथ रहता है
रजिस्ट्रेशन हमारे ज़िम्मे
पहाड़ी इलाक़ों में ठहरना
पहाड़ी रास्तों के लिए AC गाड़ियाँ
हिंदी और अंग्रेज़ी सहायता
पूछताछ से यात्रा तक
पूछताछ से यात्रा तक
- 1
1. अपनी तारीख़ें और पसंद बताइए
यात्रा का महीना, कितने लोग, और हेलीकॉप्टर, पूरी सड़क यात्रा या दोनों का मेल — जो मन में हो, बताइए। WhatsApp, फ़ोन या पूछताछ फ़ॉर्म से — अभी कोई बंधन नहीं।
- 2
2. हम यात्रा-योजना और कोटेशन भेजते हैं
दिन-प्रतिदिन की योजना, हेलीकॉप्टर/सड़क का मेल, होटल, गाड़ियाँ, क्या-क्या शामिल है। जितनी बार चाहें बदलवाइए। पक्का कोटेशन — बाद में कोई हैरानी नहीं।
- 3
3. रजिस्ट्रेशन और बुकिंग
हम हर यात्री का उत्तराखंड चार धाम रजिस्ट्रेशन भरते हैं, ज़रूरत हो तो हेलीकॉप्टर स्लॉट पक्के करते हैं, और होटल-गाड़ियाँ कन्फ़र्म करते हैं।
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4. यात्रा कीजिए, हम फ़ोन पर साथ हैं
आपको सारी बुकिंग, ड्राइवरों और आपातकालीन नंबरों वाला कन्फ़र्मेशन पैक मिलता है। योजना में कोई भी बदलाव हो, पूरी यात्रा में हम फ़ोन पर आपके साथ रहते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चार धाम यात्रा — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में चार धाम यात्रा कब खुलती है?
हर धाम के कपाट अक्षय तृतीया पर या उसके आसपास, अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में खुलते हैं। सही तिथियाँ हर साल मंदिर समितियाँ घोषित करती हैं। यात्रा आमतौर पर अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत तक चलती है, और कपाट दीपावली-भाई दूज के आसपास बंद होते हैं।
क्या उत्तराखंड चार धाम रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है?
हाँ। चारों में से किसी भी धाम के दर्शन से पहले हर यात्री को उत्तराखंड सरकार का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा करना होता है। आपके बुक किए हुए समूह के हर यात्री का यह रजिस्ट्रेशन पैकेज के हिस्से के तौर पर हम करते हैं।
क्या बुज़ुर्ग यात्री चार धाम कर सकते हैं?
हाँ, लेकिन ऊँचाई का असर सचमुच होता है — चार में से तीन धाम 3,000 मीटर से ऊपर हैं। 65 से ऊपर के, या दिल, साँस या ब्लड प्रेशर की तकलीफ़ वाले यात्रियों के लिए हम हेलीकॉप्टर पैकेज और यात्रा से पहले डॉक्टर से फ़िटनेस जाँच की सलाह देते हैं। जो आख़िरी चढ़ाई पैदल नहीं कर सकते, उनके लिए यमुनोत्री और केदारनाथ में घोड़ा, पालकी और पिट्ठू की सुविधा उपलब्ध रहती है।
चार धाम और आदि चार धाम में क्या फ़र्क़ है?
आज चार धाम से आमतौर पर उत्तराखंड की यात्रा — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ — समझी जाती है, जिसकी जानकारी इसी पेज पर है। आदि शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में अखिल भारतीय स्तर पर एक अलग चार धाम भी स्थापित किए — बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम और द्वारका — जिनकी जानकारी हमारे आदि चार धाम पेज पर है।
यात्रा कब टालनी चाहिए?
जुलाई और अगस्त से बचें — गढ़वाल में मानसून का समय है, जब भारी बारिश, भूस्खलन और सड़कें बार-बार बंद होती हैं। मई से मध्य जून और मध्य सितंबर से अक्टूबर में मौसम टिका रहता है। कपाट खुलने के दिन और दीपावली का सप्ताह भक्ति-भाव से भरे होते हैं, पर भीड़ बहुत रहती है।
मौसम ख़राब हो तो क्या हेलीकॉप्टर पैकेज रद्द हो सकते हैं?
हाँ — हेलीकॉप्टर उड़ानें पूरी तरह हर हेलीपैड के मौसम और विज़िबिलिटी पर निर्भर हैं। उड़ान रुक जाए तो ऑपरेटर आमतौर पर अगले उपलब्ध स्लॉट पर दोबारा बुकिंग या न उड़े हिस्से का रिफ़ंड देते हैं। हम ऑपरेटर से तालमेल में मदद करते हैं और ज़रूरत के हिसाब से बाक़ी यात्रा-योजना बदल देते हैं।
कपड़े और सामान क्या-क्या ले जाएँ?
गरम ऊनी कपड़े (गर्मियों में भी तापमान 5°C से नीचे चला जाता है), बारिश से बचाव का सामान, मज़बूत चलने वाले जूते, ज़रूरी दवाइयाँ — ऊँचाई के लिए डॉक्टर की लिखी दवाएँ भी — टॉर्च, सनस्क्रीन, धूप का चश्मा और निजी ज़रूरत का सामान। बड़कोट और जोशीमठ से ऊपर ATM और मोबाइल नेटवर्क का भरोसा नहीं — नक़द पर्याप्त साथ रखें।
क्या आप गंगोत्री या बद्रीनाथ में पिंडदान/तर्पण की व्यवस्था करते हैं?
हाँ — गंगोत्री में या बद्रीनाथ के ब्रह्म कपाल पर तर्पण, पिंडदान और पितृ-कर्म के लिए हम योग्य पंडित जी की व्यवस्था कर सकते हैं। पूछताछ के समय ही बता दें, ताकि मुहूर्त और पंडित जी की दक्षिणा यात्रा-योजना में जोड़ी जा सके।
उत्तराखंड यात्रा रजिस्ट्रेशन कैसे पूरा करें?
registrationandtouristcare.uk.gov.in पर निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करें — यही एकमात्र आधिकारिक पोर्टल है, जिसे उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड चलाता है। अपनी ID, यात्रा की तारीख़ें और जिन धामों में जाना है, वह भरें; एक QR कोड मिलता है जो यात्रा की चौकियों पर जाँचा जाता है। 2026 सीज़न का रजिस्ट्रेशन 6 मार्च 2026 से खुला। हरिद्वार और ऋषिकेश में ऑफ़लाइन काउंटर भी हैं, लेकिन निकलने से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर लेना कहीं सुरक्षित है। हम हर यात्री को निकलने से पहले पूरी प्रक्रिया समझाकर करवाते हैं।
चार धाम के लिए सबसे अच्छे महीने कौन-से हैं?
मई–जून और सितंबर–अक्टूबर। जुलाई-अगस्त मानसून के महीने हैं — केदारनाथ और बद्रीनाथ हाईवे पर भूस्खलन और सड़कें बंद होने का ख़तरा सचमुच रहता है, इसलिए तब यात्रा की सलाह हम नहीं देते। 2026 का सीज़न 19 अप्रैल से नवंबर के पहले-दूसरे सप्ताह तक चलता है, कपाट दीपावली-भाई दूज के आसपास बंद होते हैं।
केदारनाथ हेलीकॉप्टर सुरक्षित तरीक़े से कैसे बुक करें?
केवल heliyatra.irctc.co.in पर — यही IRCTC HeliYatra का आधिकारिक पोर्टल है। बुकिंग सीज़न भर चरणों में खुलती है और कुछ ही घंटों में भर जाती है। कोई अधिकृत एजेंट नहीं है — नक़ली वेबसाइटें और सोशल मीडिया पेज हर साल फ़र्ज़ी केदारनाथ हेली टिकट बेचते हैं, इसलिए किसी भी दूसरे विक्रेता को ठगी ही समझें। पहले आपका उत्तराखंड यात्रा रजिस्ट्रेशन पूरा होना ज़रूरी है; पोर्टल इसके बिना बुकिंग नहीं लेता।
क्या 2027 सीज़न की योजना अभी से शुरू कर सकते हैं?
हाँ — और मई-जून की यात्रा के लिए करनी भी चाहिए। परंपरा है कि केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि पर और बद्रीनाथ की बसंत पंचमी के आसपास घोषित होती है; यमुनोत्री और गंगोत्री अक्षय तृतीया (अप्रैल 2027 के अंत) पर खुलते हैं; रजिस्ट्रेशन आमतौर पर मार्च में खुलता है। शुरुआती हफ़्तों के लिए रास्ते के होटल और गाड़ियाँ सबसे पहले भर जाती हैं। WhatsApp पर अपना समय बताइए — हम योजना सँभालकर रखते हैं, और तिथियाँ घोषित होते ही पक्का लिखित कोटेशन भेजते हैं।
2026 में चार धाम यात्रा पैकेज का ख़र्च कितना है?
2026 सीज़न के बाज़ार भाव: सड़क से साझा समूह प्रस्थान लगभग ₹19,000–25,000 प्रति व्यक्ति; AC गाड़ी और बेहतर होटलों वाले निजी पारिवारिक पैकेज आमतौर पर ₹28,000–45,000 प्रति व्यक्ति; पूरा हेलीकॉप्टर चार धाम लगभग ₹1.6–2.35 लाख प्रति व्यक्ति। सही रक़म आपके यात्रा के महीने, समूह के आकार और होटल की श्रेणी पर निर्भर है — WhatsApp पर अपनी योजना बताइए, हम हर मद अलग-अलग लिखा हुआ पक्का कोटेशन भेजते हैं। पहाड़ पर कोई छिपा ख़र्च नहीं।
चार धाम यात्रा के लिए कितने दिन चाहिए?
सड़क से, हरिद्वार से चारों धाम परंपरा की रफ़्तार से 9–12 दिन में। हेलीकॉप्टर से यही यात्रा देहरादून से 5–6 दिन में हो जाती है। समय कम हो तो दो धाम (केदारनाथ और बद्रीनाथ) सड़क से 6–7 दिन लेते हैं।
दिल्ली से चार धाम यात्रा कैसे करें?
पहले हरिद्वार या ऋषिकेश पहुँचिए — दिल्ली से ट्रेन या सड़क से 4–6 घंटे, या जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (देहरादून) तक उड़ान। हमारे पैकेज हरिद्वार, ऋषिकेश या देहरादून से शुरू होते हैं; दिल्ली से आने-जाने का एक-एक दिन योजना में और जोड़ लें। दिल्ली–हरिद्वार टैक्सी भी हम पैकेज के हिस्से के तौर पर लगा सकते हैं।
समूह प्रस्थान चुनें या निजी गाड़ी?
समूह प्रस्थान में तय तारीख़ों पर बस या टेम्पो ट्रैवलर साझा होता है — सबसे किफ़ायती तरीक़ा, और अकेले यात्रियों व दंपतियों के लिए अच्छा साथ भी। निजी AC गाड़ी महँगी पड़ती है, पर रफ़्तार अपनी होती है: बुज़ुर्गों के लिए बीच-बीच में ज़्यादा विश्राम, दर्शन के लिए खुला समय और तारीख़ों में लचीलापन। जिन परिवारों में बुज़ुर्ग यात्री हों, वे लगभग हमेशा निजी गाड़ी ही चुनते हैं।
क्या IRCTC या ट्रेन से चार धाम का कोई विकल्प है?
IRCTC अपने बंडल टूर चलाता है, और केदारनाथ हेलीकॉप्टर शटल केवल आधिकारिक IRCTC HeliYatra पोर्टल पर ही बुक होती है। ज़्यादातर यात्री बस ट्रेन से हरिद्वार पहुँचते हैं और वहीं से सड़क यात्रा शुरू करते हैं — अपनी ट्रेन के पहुँचने का समय बताइए, हम पिकअप और यात्रा-योजना उसी के हिसाब से बनाते हैं।

अपनी चार धाम यात्रा शुरू कीजिए
यात्रा का महीना बताइए — कुछ ही घंटों में साफ़ यात्रा-योजना, कोटेशन और रजिस्ट्रेशन की रूपरेखा आपके पास होगी।
यात्रा जारी रखें
और यात्राएँ
बुकिंग और भुगतान
यह कैसे होता है
कोई छिपी बात नहीं। आपके पहले संदेश से यात्रा के दिन तक ठीक-ठीक यही होता है।
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अपनी तारीखें बताएँ
WhatsApp, फोन या पूछताछ फॉर्म से तारीखें, यात्रियों की संख्या और पसंद बताएँ। अभी कोई बंधन नहीं।
- 2
यात्रा-कार्यक्रम और कोटेशन पाएँ
हम लिखित यात्रा-कार्यक्रम, समावेश और पक्का कोटेशन भेजते हैं। आप बिना किसी शुल्क के बदलाव या मना कर सकते हैं।
- 3
ऑनलाइन इनवॉइस से भुगतान
भुगतान मानक इनवॉइस और डिजिटल माध्यमों (UPI, कार्ड, नेट-बैंकिंग) से होता है।
- 4
पुष्टि और सहायता
पुष्टि ईमेल में आपकी बुकिंग, संपर्क और पिकअप समय होते हैं। रिफंड, यदि लागू हो, हमारी प्रकाशित नीतिके अनुसार होता है।

