
तीर्थ यात्रा पैकेज
वाराणसी + बोधगया बौद्ध धरोहर यात्रा — 5 दिन
पाँच सहज दिन बौद्ध मार्ग पर — सारनाथ, जहाँ धर्मचक्र प्रवर्तन हुआ; और बोधगया, जहाँ बोधि वृक्ष के नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति हुई।
पारंपरिक क्रम
पहले से तय बुकिंग
सहज गति
जानकारी-पुस्तिका साथ
पाँच सहज दिनों में बौद्ध तीर्थयात्रा — चार पवित्रतम स्थलों में से दो। सारनाथ, जहाँ धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त पहली बार दिया गया, और बोधगया, जहाँ बोधि वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्ति हुई। पहले दिन वाराणसी का सार, दूसरे दिन पूरा सारनाथ, तीसरे दिन AC कैब से बोधगया स्थानांतरण, और दो सहज दिन महाबोधि मंदिर परिसर में — बोधि वृक्ष के नीचे मौन ध्यान का समय कार्यक्रम में सुरक्षित। थाईलैंड, श्रीलंका, जापान, कोरिया, म्यांमार, वियतनाम और पश्चिम के साधकों के लिए।
दिन-प्रतिदिन
कार्यक्रम
5 दिन · विस्तार हेतु क्लिक करें
पहला दिन आपको बौद्ध दिनों से पहले वाराणसी में बैठा देता है। आगमन, होटल में बसना, और शाम को गंगा से पहली भेंट — घाटों पर थोड़ी पैदल यात्रा, फिर दशाश्वमेध की संध्या आरती के लिए आरक्षित बैठक। काशी को पहले देख लेना — आगे सारनाथ और बोधगया जो कहेंगे, उसके लिए एक सुंदर भूमिका रच देता है।
पिकअप + होटल
होटल भोजन
परिचय घाट वॉक
गंगा आरती (सांस्कृतिक संदर्भ)
रात्रि भोजन
दूसरा दिन सारनाथ का है। हम ठंडी सुबह में 13 किमी उत्तर उसी मृगदाव की ओर बढ़ते हैं जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था। पहले धामेक स्तूप, फिर 1930 के दशक के भित्ति-चित्रों वाला मूलगन्धकुटी विहार, अंतरराष्ट्रीय विहारों का परिसर, और अंत में पुरातात्विक संग्रहालय जहाँ अशोक सिंह-शीर्ष रखा है। गति जान-बूझकर धीमी रखी जाती है — सारनाथ बैठने पर अधिक खुलता है, चलने पर कम।
नाश्ता
धामेक स्तूप + हिरण पार्क
मूलगंध कुटी विहार
संग्रहालय + अशोक स्तंभ
दोपहर भोजन
अंतर्राष्ट्रीय मठ
रात्रि भोजन
सूचना Museum closed Fridays.
तीसरे दिन AC कैब से बोधगया स्थानांतरण — अच्छी सड़कों पर लगभग 5 घंटे। नाश्ते के बाद वाराणसी से सहज प्रस्थान, दोपहर तक बोधगया पहुँच, और जब दिन की धूप कुछ ढीली हो जाती है — हम महाबोधि मंदिर पैदल जाते हैं। बोधि वृक्ष का पहला दर्शन — और बिहार के आकाश पर मंदिर के पत्थर के शिखर का आकार — देर दोपहर की तिरछी किरणों में आपके सामने खुलता है।
नाश्ता + चेकआउट
बोधगया AC कैब
दोपहर भोजन + होटल
महाबोधि मंदिर + बोधि वृक्ष
रात्रि भोजन
चौथा दिन बोधगया का हृदय है। सुबह बोधि वृक्ष के नीचे मौन ध्यान को दी जाती है — कम से कम दो घंटे, निर्धारित क्षेत्र में, अपनी रीति से। दोपहर में छह अंतरराष्ट्रीय विहारों का भ्रमण — थाई, जापानी, वियतनामी, भूटानी, तिब्बती, चीनी — हर विहार एक खिड़की है कि उसकी परंपरा ने धर्म को कैसे अपने यहाँ संजोया। गति जान-बूझकर धीमी रखी जाती है।
बोधि वृक्ष पर मौन ध्यान
नाश्ता
अनिमेष लोचना चैत्य + राजायतन वृक्ष
दोपहर भोजन
अंतर्राष्ट्रीय मठ
रात्रि भोजन
सूचना Meditation zones open 5 AM – 9 PM.
पाँचवाँ दिन एक शान्त समापन सुबह — बोधि वृक्ष पर एक अंतिम ध्यान, यात्रा समाप्त होने से पहले। प्रस्थान गया हवाई अड्डे से (सीमित उड़ानें — मुख्यतः दिल्ली और कोलकाता), या AC कैब से वाराणसी वापसी (5 घंटे) — अंतरराष्ट्रीय आगे की यात्रा के लिए। आपके दिनों के अनुसार दोनों विकल्प हम जाँच लेते हैं।
बोधि वृक्ष पर प्रातः ध्यान
नाश्ता + चेकआउट
गया हवाई अड्डा या वाराणसी वापसी
सूचना Gaya airport has limited flights; Varanasi has more options for onward travel.
कैमरे की नज़र से
तस्वीरें
5 तस्वीरें
कहानी
इस पैकेज के बारे में
बौद्ध परंपरा में चार स्थानों को सर्वाधिक पवित्र माना गया है: लुम्बिनी (जन्म), बोधगया (ज्ञान प्राप्ति), सारनाथ (प्रथम उपदेश), और कुशीनगर (महापरिनिर्वाण)। यह यात्रा उनमें से दो को समेटती है — सारनाथ और बोधगया — जो भौगोलिक दृष्टि से इतने निकट हैं कि एक ही यात्रा में सहज रूप से समेटे जा सकते हैं, और जो मिलकर धर्म के आरंभ की भूमि हैं।
पहला दिन आपको वाराणसी से जोड़ता है, और शाम को घाटों पर गंगा आरती। दूसरा दिन पूरा सारनाथ — बिना हड़बड़ी। तीसरे दिन AC कैब से बोधगया (लगभग 5 घंटे), और उसी दोपहर महाबोधि मंदिर तथा बोधि वृक्ष के दर्शन। चौथा दिन बोधगया का गहरा दिन है — बोधि वृक्ष के नीचे मौन ध्यान का समय कार्यक्रम में सुरक्षित, और दोपहर में छह अंतरराष्ट्रीय विहारों का सहज भ्रमण। पाँचवाँ दिन — एक शान्त समापन ध्यान, और गया से प्रस्थान या वाराणसी वापसी।
हम आपकी यात्रा का ख़याल कैसे रखते हैं
- दोनों स्थलों को उतना समय जितना वे माँगते हैं। सारनाथ को पूरा एक दिन, बोधगया को दो दिन — बोधि वृक्ष के नीचे बैठने का समय कार्यक्रम में पहले से तय, अंत में जोड़ा हुआ नहीं।
- ज़रूरी बुकिंग पहले से सुनिश्चित। संध्या गंगा आरती के लिए आरक्षित बैठक, अंतर-नगर कैब एक दिन पहले से तैयार, जिन विहारों में पूर्व सूचना उपयोगी है — वहाँ परिचय पहले से।
- गति सहज रखी जाती है। पाँच दिन, हर पड़ाव पर दोपहर का विश्राम। कार्यक्रम भोर और देर दोपहर पर टिका है, ताकि बोधगया की लंबी दोपहरें ठहरकर बिताई जा सकें।
- आप पूरी जानकारी के साथ पहुँचते हैं। पहले दिन से पहले ही आपको एक छपी हुई जानकारी-पुस्तिका मिल जाती है — अंग्रेज़ी और पाली में सुत्त संदर्भ, हर स्थल का संक्षिप्त इतिहास, परंपरा-वार विहार-टिप्पणियाँ, और दोनों नगरों की छोटी-छोटी आवश्यक बातें।
यह यात्रा किसके लिए है
- दक्षिण-पूर्व एशिया के बौद्ध तीर्थयात्री (थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार, वियतनाम)
- पूर्वी एशिया के बौद्ध साधक (जापान, कोरिया, ताइवान)
- पश्चिम के बौद्ध साधक (तिब्बती महायान, थेरवाद, ज़ेन)
- बुद्ध के जीवन और संघ के आरंभिक इतिहास में रुचि रखने वाले भारतीय यात्री
- इतिहासकार, विद्वान और धर्म-अध्ययन के छात्र
आप साथ क्या ले जाएँगे
सारनाथ के धामेक स्तूप की वह शान्ति, जहाँ धर्मचक्र की पहली गति आरंभ हुई थी। मूलगन्धकुटी के भित्ति-चित्रों के रंग, जो जातक कथाएँ कहते हैं। बिहार के आकाश पर महाबोधि मंदिर के शिखर का आकार। बोधि वृक्ष के चारों ओर एक दर्जन परंपराओं के भिक्षुओं के भोर के पाठ की ध्वनि — और उसके बीच की चुप्पी। और पहले दिन वाराणसी से — गंगा में प्रतिबिम्बित संध्या आरती के दीप।
कब आएँ
| समय | मौसम | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 15 अक्टूबर – 15 मार्च | 10–28°C | सबसे सुहावना समय। बुद्ध जयंती / वेसाक (मई) भी सुंदर समय है, परंतु गर्म। |
| अप्रैल – जून | 26–42°C | गर्मी; कार्यक्रम भोर और देर दोपहर पर टिका, बीच में AC में विश्राम। |
| जुलाई – सितंबर | मानसून | वातावरण ठहरा हुआ। सारनाथ और बोधगया — दोनों मानसून में ठीक रहते हैं; केवल वाराणसी की नाव कभी रद्द हो सकती है। |
बोधगया के बारे में
बोधगया वाराणसी से छोटा शहर है — शान्त, गहराई तक बौद्ध, जहाँ विश्व के लगभग हर बौद्ध देश का अपना विहार है। महाबोधि मंदिर परिसर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। बोधि वृक्ष के नीचे मौन ध्यान निर्धारित क्षेत्रों में सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक संभव है। हर अंतरराष्ट्रीय विहार अपनी परंपरा का शिष्टाचार रखता है — पुस्तिका में हर विहार के लिए वस्त्र, ध्यान-समय और छोटी आवश्यकताएँ अलग-अलग दी हैं।
आगमन से पहले जानने योग्य कुछ बातें
- सूती कपड़े पहनें। सर्दियों में भी दोपहरें धूप में गर्म लग सकती हैं, और सिंथेटिक मंदिरों और विहारों की भीड़ में असुविधाजनक होते हैं।
- ₹2,000 छोटे नोटों में साथ रखें — ₹10 और ₹50 के नोट दक्षिणा, विहारों में मोमबत्ती और छोटे चढ़ावे, और चाय के लिए।
- जूते। हर विहार पर, महाबोधि मंदिर परिसर में, और सारनाथ के स्तूप परिसर में जूते उतारने पड़ते हैं। बिना तस्मे वाले जूते सरल रहते हैं।
- विहारों और मंदिर में शालीन वस्त्र। कंधे और घुटने ढँके रहें। हल्के रंग सराहे जाते हैं। दुपट्टा या शॉल काम आती है।
- फ़ोटोग्राफ़ी। अधिकांश विहार-आँगनों और महाबोधि के बाहरी परिसर में अनुमति है। गर्भगृहों के भीतर और पाठ-सत्रों के समय नहीं। पुस्तिका में प्रत्येक स्थान के लिए विवरण है।
- सारनाथ का संग्रहालय शुक्रवार को बंद। यदि कार्यक्रम शुक्रवार पड़ता है, तो हम संग्रहालय का दर्शन दूसरे दिन की सुबह में स्थानांतरित कर देते हैं।
बोधगया में जिन अंतरराष्ट्रीय विहारों से होकर हम चलते हैं
- थाई राजकीय विहार (वाट थाई) — शास्त्रीय थाई वास्तुकला, स्वर्णिम छतें
- जापानी इंदोसन निप्पोंजी — ज़ेन-प्रेरित सादगी
- वियतनाम फट क्वोक तू — दक्षिण-पूर्व एशियाई शैली, बड़ा सभागार
- भूटानी राजकीय विहार — अलंकृत, रंगों से भरा, हिमालयी मूर्ति-कला
- करमापा तेरगर विहार (तिब्बती) — महायान परंपरा का सक्रिय केंद्र
- चीनी बौद्ध मंदिर, बोधगया — महाबोधि परिसर के पास चीनी शैली का शांत मंदिर
अनुरोध पर उपलब्ध ऐड-ऑन
मुख्य पैकेज अपने आप में पूरा है। ये अतिरिक्त सेवाएँ अनुरोध पर उपलब्ध हैं, और आपके quote में अलग से जोड़ी जाती हैं:
- अंग्रेज़ी-भाषी बौद्ध-अध्ययन गाइड — सारनाथ दिन के लिए, बोधगया दिनों के लिए, या तीनों दिन
- किसी विहार में पाली पाठ-सत्र — पूर्व व्यवस्था पर
- बोधि वृक्ष पर निवासी आचार्य से निजी ध्यान-निर्देश — उपलब्धता पर निर्भर
- पहले दिन की दोपहर में वाराणसी की पुरानी गलियों में हेरिटेज वॉक
- लक्ज़री होटल अपग्रेड — वाराणसी में (BrijRama, Taj Ganges, Suryauday Haveli) और बोधगया में (Hotel Bodhgaya Regency या समतुल्य), अतिरिक्त शुल्क पर
- राजगीर और नालंदा का विस्तार — बिहार में रहते हुए एक या दो दिन का अतिरिक्त भ्रमण — रुचि हो तो नालंदा स्थित ह्वेन त्सांग स्मारक सहित, 7वीं शताब्दी के यात्री की स्मृति में
पूछताछ में जो भी जोड़ना चाहें, बता दें; हम उसे आपके quote में शामिल कर देंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या इसमें लुम्बिनी या कुशीनगर शामिल है?
इस पैकेज में नहीं। चारों स्थलों वाले पूर्ण बौद्ध सर्किट (नेपाल का लुम्बिनी + बोधगया + सारनाथ + कुशीनगर) के लिए हम अनुरोध पर 8 से 10-दिवसीय विस्तृत यात्रा बनाते हैं। पूछताछ में उल्लेख कर दें, हम quote तैयार कर देंगे।
क्या बोधि वृक्ष के नीचे ध्यान कर सकते हैं?
हाँ। बोधि वृक्ष के चारों ओर ध्यान के निर्धारित क्षेत्र सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक खुले रहते हैं। चौथे दिन की सुबह में हम 2+ घंटे का मौन ध्यान-समय पहले से सुरक्षित रखते हैं — दोपहर के विहार-भ्रमण से पहले। शाम को आप अपनी रुचि से फिर लौट सकते हैं।
विहारों के वस्त्र-नियम क्या हैं?
परंपरा के अनुसार बदलते हैं। अधिकांश विहार कंधे और घुटने ढँकने की अपेक्षा रखते हैं; कुछ में जूते बाहर उतारने पड़ते हैं; तिब्बती और भूटानी विहार चटक रंगों के बजाय हल्के रंगों को पसंद करते हैं। पुस्तिका हर विहार का विवरण अलग देती है। सफ़ेद, हल्के या मधुर रंग सब जगह उपयुक्त रहते हैं।
क्या महाबोधि मंदिर में भीड़ होती है?
बौद्ध त्योहारों के दिन (मई में वेसाक, अक्टूबर-नवंबर में कठिन) और जब दलाई लामा का कालचक्र-उपदेश हो — तब पूरा भरा रहता है। अन्य समय शान्त। हम दर्शन भोर या देर दोपहर में रखते हैं ताकि दोपहर की टूर-ग्रुप-भीड़ से बच सकें।
क्या गाइड शामिल है?
मुख्य पैकेज में आगमन से पहले छपी हुई जानकारी-पुस्तिका शामिल है — अंग्रेज़ी और पाली में सुत्त संदर्भ, स्थलों का इतिहास, विहार-टिप्पणियाँ और सांस्कृतिक प्रोटोकॉल। बौद्ध-अध्ययन गाइड अनुरोध पर अतिरिक्त शुल्क पर उपलब्ध — सारनाथ दिन के लिए, बोधगया दिनों के लिए, या दोनों के लिए। पूछताछ में बताएँ।
क्या बौद्ध या हिन्दू होना ज़रूरी है?
बिल्कुल नहीं। यह यात्रा सारनाथ, बोधगया और काशी की ओर खिंचे किसी भी व्यक्ति के लिए है — किसी भी आस्था का, या किसी भी आस्था का नहीं। पुस्तिका हर स्थल और अनुष्ठान का अर्थ सरल भाषा में बताती है।
वाराणसी से बोधगया कैसे पहुँचते हैं?
AC कैब से, लगभग 5 घंटे। सड़कें अच्छी हैं। तीसरे दिन की सुबह यह यात्रा होती है ताकि आप उसी दोपहर महाबोधि मंदिर के दर्शन कर सकें। यदि चाहें तो ट्रेन का विकल्प भी है — व्यवस्था की जा सकती है।
पाँचवें दिन कैसे लौटते हैं?
दो विकल्प। गया हवाई अड्डे से सीमित उड़ानें — मुख्यतः दिल्ली, कोलकाता, और मौसम के अनुसार बैंकॉक, यांगून — समय बदलते रहते हैं। अधिक विकल्पों के लिए AC कैब से वाराणसी (5 घंटे) लौटकर लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आगे की यात्रा सुविधाजनक रहती है। आपके दिनों के अनुसार दोनों विकल्प हम जाँच लेते हैं।
उत्तर कितनी जल्दी मिलता है?
कार्य दिवसों में 6 कार्य घंटों के भीतर (सोम–शनि, सुबह 9 से शाम 7, IST)। रविवार और अवकाश के दिनों में 24 घंटों के भीतर। हर पूछताछ का उत्तर हमारी टीम के एक सदस्य से नाम के साथ आता है।
संबंधित पैकेज
- समय कम है? देखें वाराणसी + सारनाथ — 2 दिन।
- काशी का अनुभव भी चाहते हैं? देखें वाराणसी तीन-दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा।
- हिन्दू मंदिर-सर्किट चाहते हैं? देखें वाराणसी + अयोध्या + प्रयागराज — 5 दिन।
आपको क्या मिलेगा
मुख्य आकर्षण
व्यवस्था
क्या शामिल है
शामिल
- 4 रातों का होटल (2 वाराणसी + 2 बोधगया — मुख्य स्थलों से पैदल दूरी पर)
- सभी भोजन — शुद्ध शाकाहारी
- वाराणसी ↔ बोधगया AC कैब ट्रांसफ़र
- पूर्ण-दिवसीय सारनाथ भ्रमण
- बोधगया की विस्तृत यात्रा — महाबोधि मंदिर, बोधि वृक्ष, 6 अंतरराष्ट्रीय विहार
- पुरातात्विक संग्रहालय प्रवेश
- पहले दिन दशाश्वमेध आरती (हिंदू सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य)
- सुत्त अंशों सहित मुद्रित पुस्तिका
- सभी ट्रांसफ़र
- दिन भर बोतलबंद पानी
शामिल नहीं
- वाराणसी आने और बोधगया से लौटने (या वाराणसी से लौटने) का परिवहन
- विहारों में ध्यान-शिविरों का अतिरिक्त शुल्क
- व्यक्तिगत शॉपिंग
- बौद्ध चढ़ावे — छोटे नोट साथ ले आएँ
- वैकल्पिक ऐड-ऑन
- यात्रा बीमा
पूछताछ करें
अपना नाम और नंबर लिखें, हमारी टीम आपको फ़ोन करेगी।
आरंभिक मूल्य
₹13,999
प्रति व्यक्ति
WhatsApp पर कुछ ही मिनटों में जवाब · सुबह 7 – रात 10 बजे
Trusted by Pilgrims
“We came for my mother's 75th birthday darshan. Satmarg arranged wheelchair access, a pandit who spoke her dialect, and a private boat for her Ganga aarti.”
“Third time using Satmarg. The cab service is top-notch — AC Innova, polite driver, no surprise charges.”
Udyam-registered MSME · UDYAM-UP-75-0177698
Varanasi-based operator · local guides & pandits
Hindi & English support · 7 AM–10 PM
महत्वपूर्ण शर्तें
रद्दीकरण नीति
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रद्दीकरण नीति
Booking: 30% advance (multi-city inventory lock); balance 21 days before arrival. Cancellation: Free up to 21 days before — full refund. 14–21 days — 50%. Within 14 days — no refund but reschedule within 6 months for medical/weather emergencies. Circuit-specific: Ayodhya/Prayagraj hotels require early lock-in. Changes to route allowed up to 7 days before arrival. Substitutions: train/cab class equivalent, hotel equivalent with approval.



