
एक circuit पैकेज
वाराणसी + सारनाथ बौद्ध धरोहर यात्रा — 2 दिन
दो सहज दिन बौद्ध मार्ग पर — पहले दिन वाराणसी का सार, फिर पूरा एक दिन सारनाथ में, उसी मृगदाव में जहाँ पहला उपदेश दिया गया था।
पारंपरिक क्रम
पहले से तय बुकिंग
सहज गति
जानकारी-पुस्तिका साथ
दो दिनों की केंद्रित बौद्ध धरोहर यात्रा — पहले दिन वाराणसी का सार और संध्या की गंगा आरती, दूसरे दिन पूरा सारनाथ बिना हड़बड़ी। धामेक स्तूप जहाँ पहला उपदेश दिया गया, मूलगन्धकुटी विहार, वही मृगदाव जहाँ आज भी हिरण घूमते हैं, और पुरातात्विक संग्रहालय जहाँ तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का अशोक सिंह-शीर्ष रखा है। दोनों दिन AC कैब और पहले दिन से पहले हाथ में छपी हुई जानकारी-पुस्तिका।
दिन-प्रतिदिन
कार्यक्रम
2 दिन · विस्तार हेतु क्लिक करें
सारनाथ के बौद्ध दिन से पहले आपका पहला दिन आपको वाराणसी में जमाता है। दोपहर बाद आप गंगा से मिलते हैं, घाटों का एक हिस्सा पैदल चलते हैं, और दिन का समापन दशाश्वमेध की संध्या आरती पर आरक्षित बैठक के साथ होता है — कल मृगदाव के बोलने से पहले नगरी का अपना परिचय। आरती सूर्यास्त के आसपास आरंभ होती है — सर्दियों में लगभग शाम 6:00–6:30, गर्मियों में 6:45–7:00 बजे; उस दिन का समय हम पहले ही पक्का कर देते हैं।
Pickup + hotel check-in
Lunch
Ghat walk and Assi exploration
Ganga Aarti
Dinner
दूसरा दिन पूरी तरह सारनाथ का है। सुबह की ठंडक में हम 13 किमी उत्तर उस मृगदाव तक जाते हैं जहाँ बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। पहले धामेक स्तूप, फिर 1930 के दशक के भित्ति-चित्रों वाला मूलगन्धकुटी विहार, अंतरराष्ट्रीय विहारों का क्षेत्र, और वह पुरातात्विक संग्रहालय जहाँ अशोक सिंह-शीर्ष रखा है। गति जानबूझकर धीमी रखी गई है — सारनाथ चलने से अधिक बैठने पर खुलता है।
Breakfast at hotel
Transfer to Sarnath
Dhamek Stupa + deer park
Mulagandha Kuti Vihara
Archaeological museum + Ashoka Lion
Lunch
International monasteries walk
Return to Varanasi + drop to station/airport
सूचना संग्रहालय शुक्रवार को बंद रहता है।
कैमरे की नज़र से
तस्वीरें
6 तस्वीरें
कहानी
इस पैकेज के बारे में
सारनाथ वही भूमि है जहाँ बौद्ध परंपरा का आरंभ हुआ। छठी शताब्दी ईसा पूर्व, बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के उनचास दिन बाद, बुद्ध वाराणसी से 13 किमी उत्तर स्थित एक मृगदाव तक पैदल पहुँचे और पाँच शिष्यों को पहला उपदेश दिया — धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त। वही पाँच शिष्य पहले संघ बने। वही मृगदाव आज का सारनाथ है। आज भी शांत, आज भी हरा-भरा, और हिरण आज भी वहीं हैं।
यह दो-दिवसीय यात्रा उन यात्रियों के लिए है जो इस कथा को उसी स्थान पर ठहरकर महसूस करना चाहते हैं। पहला दिन आपको वाराणसी से जोड़ता है — घाट और संध्या की गंगा आरती। दूसरा दिन पूरी तरह सारनाथ का है — धामेक स्तूप, मूलगन्धकुटी विहार जहाँ 1930 के दशक के कोसेत्सु नोसु के भित्ति-चित्र हैं, अंतरराष्ट्रीय विहार (थाई, तिब्बती, बर्मी, जापानी, श्रीलंकाई), और पुरातात्विक संग्रहालय जहाँ तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का वह अशोक सिंह-शीर्ष रखा है — जो आज भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
हम आपकी यात्रा का ख़याल कैसे रखते हैं
- सारनाथ को पूरा एक दिन। स्थल छोटा है — इतना कि उसे ठहरकर ही ठीक से देखा जा सकता है। हम स्तूप के पास बैठने और अंतरराष्ट्रीय विहारों में सहज गति से चलने का समय रखते हैं।
- ज़रूरी बुकिंग पहले से सुनिश्चित। संध्या गंगा आरती के लिए आरक्षित बैठक, सारनाथ की AC कैब एक दिन पहले से तैयार, संग्रहालय का प्रवेश-समय भीड़ से बचाकर तय।
- गति सहज रखी जाती है। दो दिन, बीच में दोपहर का विश्राम — ताकि यात्रा भरपूर लगे, थका देने वाली नहीं।
- आप पूरी जानकारी के साथ पहुँचते हैं। पहले दिन से पहले ही आपको एक छपी हुई जानकारी-पुस्तिका मिल जाती है — सुत्त संदर्भ, सारनाथ की संक्षिप्त पुरातात्विक पृष्ठभूमि, हर स्तूप और विहार में क्या देखें, और नगरी की छोटी-छोटी आवश्यक बातें।
यह यात्रा किसके लिए है
- थाईलैंड, श्रीलंका, जापान, कोरिया, म्यांमार, वियतनाम से चार प्रमुख स्थलों में से एक पर आते बौद्ध तीर्थयात्री
- चारों स्थलों की तीर्थयात्रा करते पश्चिमी बौद्ध साधक (तिब्बती, ज़ेन, थेरवाद)
- बुद्ध के जीवन और संघ के आरंभिक इतिहास में रुचि रखने वाले भारतीय यात्री
- ऐसे यात्री जो एक छोटी, संतुलित यात्रा में बौद्ध और हिन्दू — दोनों धरोहर का अनुभव चाहते हैं
आप साथ क्या ले जाएँगे
धामेक स्तूप के सम्मुख खड़े होने की वह शान्ति, जहाँ धर्मचक्र-प्रवर्तन की पहली गति आरंभ हुई थी। मूलगन्धकुटी विहार के भित्ति-चित्रों के रंग, जो जातक कथाएँ कहते हैं। संग्रहालय में काँच के पीछे रखे अशोक सिंह-शीर्ष की वह सूक्ष्म, सटीक गरिमा — जो आपके अनुमान से कहीं छोटा, और कहीं अधिक प्राचीन है। और एक दिन पहले — संध्या आरती के दीप, और राम भंडार की पहली गर्म कचौड़ी।
कब आएँ
| समय | मौसम | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 15 अक्टूबर – 15 मार्च | 10–28°C | सबसे सुहावना समय — सारनाथ की दोपहरें साफ़, घाटों की शामें सुहानी। |
| अप्रैल – जून | 26–42°C | गर्मी; कार्यक्रम सुबह-केंद्रित, बीच में AC में विश्राम। |
| जुलाई – सितंबर | मानसून | वातावरण ठहरा हुआ, परंतु नाव कभी रद्द हो सकती है। सारनाथ पूरे साल खुला रहता है; संग्रहालय भी। |
आगमन से पहले जानने योग्य कुछ बातें
- सूती कपड़े पहनें। सर्दियों में भी सारनाथ की दोपहरें धूप में गर्म लग सकती हैं, और सिंथेटिक मंदिरों की भीड़ में असुविधाजनक होते हैं।
- ₹1,500 छोटे नोटों में साथ रखें — ₹10 और ₹50 के नोट दक्षिणा, विहारों में मोमबत्ती और छोटे चढ़ावे, और चाय के लिए।
- जूते। हर विहार पर और संग्रहालय के स्तूप परिसर में जूते उतारने पड़ते हैं। बिना तस्मे वाले जूते सरल रहते हैं।
- विहारों में शालीन वस्त्र। कंधे और घुटने ढँके रहें। दुपट्टा या हलकी शॉल काम आती है।
- फ़ोटोग्राफ़ी। अधिकांश बाहरी स्तूपों और विहार-आँगनों में अनुमति है। मूलगन्धकुटी के गर्भगृह और संग्रहालय (विशेषकर सिंह-शीर्ष कक्ष) में नहीं। पुस्तिका में प्रत्येक स्थान के लिए विवरण है।
- संग्रहालय शुक्रवार को बंद। यदि आपका कार्यक्रम शुक्रवार को सारनाथ रखता है, तो हम संग्रहालय का दर्शन पहले दिन की देर दोपहर में रख देते हैं (संग्रहालय शाम 5 बजे तक खुला रहता है)।
अनुरोध पर उपलब्ध ऐड-ऑन
मुख्य पैकेज अपने आप में पूरा है। ये अतिरिक्त सेवाएँ अनुरोध पर उपलब्ध हैं, और आपके quote में अलग से जोड़ी जाती हैं:
- पूरे सारनाथ दिन के लिए अंग्रेज़ी-भाषी बौद्ध-अध्ययन गाइड — हर स्तूप, विहार और जातक चित्र-पैनल का अर्थ साथ-साथ समझाया जाता है
- किसी अंतरराष्ट्रीय विहार में पाली पाठ-सत्र — पूर्व व्यवस्था पर
- पहले दिन की दोपहर में वाराणसी की पुरानी गलियों में हेरिटेज वॉक
- वाराणसी में लक्ज़री होटल अपग्रेड — BrijRama Palace, Taj Ganges, या Suryauday Haveli, अतिरिक्त शुल्क पर
पूछताछ में जो भी जोड़ना चाहें, बता दें; हम उसे आपके quote में शामिल कर देंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या बोधगया इसमें शामिल है?
इस पैकेज में नहीं। पूर्ण बौद्ध सर्किट (सारनाथ + बोधगया) के लिए हमारा 5-दिवसीय वाराणसी + बोधगया बौद्ध पैकेज देखें।
क्या हम अंतरराष्ट्रीय विहारों के दर्शन कर सकते हैं?
हाँ। सारनाथ में थाई, जापानी, तिब्बती, बर्मी, श्रीलंकाई, वियतनामी और कोरियाई — सभी सक्रिय विहार हैं, अधिकांश मुख्य पुरातात्विक स्थल से पैदल दूरी पर। पुस्तिका बताती है कि कौन-से विहार वास्तुकला की दृष्टि से उल्लेखनीय हैं और प्रत्येक परंपरा की मूर्ति-कला कैसी होती है।
यदि सारनाथ का दिन शुक्रवार पड़ जाए तो?
पुरातात्विक संग्रहालय शुक्रवार को बंद रहता है। यदि आपके दिन शुक्रवार को सारनाथ तय करते हैं, तो हम संग्रहालय का दर्शन पहले दिन की देर दोपहर में — संध्या की घाट-वॉक से पहले — रख देते हैं (संग्रहालय शाम 5 बजे तक खुला रहता है)। धामेक स्तूप, मृगदाव और विहार सब शुक्रवार को खुले रहते हैं।
क्या गाइड शामिल है?
मुख्य पैकेज में आगमन से पहले छपी हुई जानकारी-पुस्तिका शामिल है — सुत्त संदर्भ, सारनाथ का संक्षिप्त इतिहास, विहारों पर टिप्पणियाँ और सांस्कृतिक प्रोटोकॉल। सारनाथ दिन के लिए बौद्ध-अध्ययन गाइड अनुरोध पर अतिरिक्त शुल्क पर उपलब्ध है। पूछताछ में अपनी आवश्यकता बताएँ।
क्या बौद्ध या हिन्दू होना ज़रूरी है?
बिल्कुल नहीं। यह यात्रा सारनाथ और काशी की ओर खिंचे किसी भी व्यक्ति के लिए है — किसी भी आस्था का, या किसी भी आस्था का नहीं। पुस्तिका हर स्थल और अनुष्ठान का अर्थ सरल भाषा में बताती है।
उत्तर कितनी जल्दी मिलता है?
कार्य दिवसों में 6 कार्य घंटों के भीतर (सोम–शनि, सुबह 9 से शाम 7, IST)। रविवार और अवकाश के दिनों में 24 घंटों के भीतर। हर पूछताछ का उत्तर हमारी टीम के एक सदस्य से नाम के साथ आता है।
संबंधित पैकेज
- पूर्ण बौद्ध सर्किट चाहते हैं? देखें वाराणसी + बोधगया बौद्ध — 5 दिन।
- काशी का अनुभव भी चाहते हैं? देखें वाराणसी तीन-दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा।
- विस्तृत सर्किट — अयोध्या और प्रयागराज सहित? देखें वाराणसी + अयोध्या + प्रयागराज — 5 दिन।
आपको क्या मिलेगा
मुख्य आकर्षण
व्यवस्था
क्या शामिल है
शामिल
- वाराणसी घाटों के पास 1 रात का होटल
- सभी भोजन — शुद्ध शाकाहारी
- AC कैब से पूर्ण-दिवसीय सारनाथ भ्रमण
- पहले दिन दशाश्वमेध आरती की आरक्षित व्यवस्था
- सभी मंदिर और विहार प्रवेश (अधिकांश निःशुल्क)
- पुरातात्विक संग्रहालय प्रवेश
- ऐतिहासिक संदर्भ और सुत्त पाठ सहित मुद्रित पुस्तिका
- रेलवे स्टेशन/हवाई अड्डा ट्रांसफ़र
- दिन भर बोतलबंद पानी
शामिल नहीं
- वाराणसी आने-जाने का परिवहन
- व्यक्तिगत शॉपिंग
- विहारों में ध्यान-शिविरों का शुल्क (कुछ समर्पित कार्यक्रमों पर लग सकता है)
- वैकल्पिक ऐड-ऑन
- यात्रा बीमा
पूछताछ करें
अपना नाम और नंबर लिखें, हमारी टीम आपको फ़ोन करेगी।
आरंभिक मूल्य
₹4,999
प्रति व्यक्ति
WhatsApp पर कुछ ही मिनटों में जवाब · सुबह 7 – रात 10 बजे
Trusted by Pilgrims
“We came for my mother's 75th birthday darshan. Satmarg arranged wheelchair access, a pandit who spoke her dialect, and a private boat for her Ganga aarti.”
“Third time using Satmarg. The cab service is top-notch — AC Innova, polite driver, no surprise charges.”
Udyam-registered MSME · UDYAM-UP-75-0177698
Varanasi-based operator · local guides & pandits
Hindi & English support · 7 AM–10 PM
महत्वपूर्ण शर्तें
रद्दीकरण नीति
महत्वपूर्ण शर्तें
रद्दीकरण नीति
Booking: 25% advance; balance 14 days before arrival. All prices on enquiry. Cancellation: Free up to 14 days before — full refund. 7–14 days — 50%. Within 7 days — no refund, but reschedule within 6 months for documented medical/weather emergencies. Weather: if boats cancelled by authorities, ghat walk substitute, ₹2,500/person refund. Substitutions: hotel equivalent with your approval; temple substitutions with 48h notice.



