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Pilgrimage Circuit

द्वादश ज्योतिर्लिंग — शिव की सभी 12 पवित्र ज्योतियाँ

12पवित्र पड़ाव
~0km Total
3–4 weeks (or split across multiple trips over a lifetime)अवधि
hardकठिनाई
Varies by location — October to March for most, avoid monsoon for Himalayan sites (Kedarnath)ऋतु

The tradition

About This Yatra

द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा शैव परंपरा की सर्वोच्च तीर्थयात्रा है — भारत भर में बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों की यात्रा, बारह स्थान जहाँ शिव ने ब्रह्मा और विष्णु को अपनी सर्वोच्चता सिद्ध करने के लिए प्रकाश के स्तंभ के रूप में प्रकट होने की कथा है।

बारह महाद्वीप भर में फैले हैं — यहाँ द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के क्रम में: सोमनाथ (गुजरात), मल्लिकार्जुन (आंध्र), महाकालेश्वर (उज्जैन), ओंकारेश्वर (नर्मदा द्वीप), वैद्यनाथ (झारखंड), भीमाशंकर (सह्याद्रि), रामेश्वरम (तमिलनाडु), नागेश्वर (गुजरात), काशी विश्वनाथ (वाराणसी), त्र्यंबकेश्वर (नाशिक), केदारनाथ (हिमालय, 3,583 मीटर), और घृष्णेश्वर (औरंगाबाद)।

बहुत कम तीर्थयात्री एक ही यात्रा में बारहों पूर्ण करते हैं। अधिकांश वर्षों, कभी-कभी दशकों में चरणों में करते हैं। परंपरा कहती है कि बारहों पूर्ण करना संपूर्ण यात्रा प्रदान करता है।

Why this route

Spiritual Significance

ज्योतिर्लिंग ब्रह्मा और विष्णु के बीच के विवाद से उत्पन्न हुए। शिव उनके बीच अनंत प्रकाश के स्तंभ — ज्योति — के रूप में प्रकट हुए। न तो कोई उसके सिरे ढूँढ सका। शिव ने फिर उन स्तंभों में से बारह को भारत भर में स्थायी तीर्थ के रूप में प्रकट किया।

प्रत्येक ज्योतिर्लिंग शिव के भिन्न पहलू को दर्शाता है — सोमनाथ — सोम अर्थात चंद्रमा के स्वामी, जिन्होंने दक्ष के क्षय-शाप से मुक्ति के लिए यहाँ शिव की आराधना की; महाकाल समय के स्वामी; रामेश्वर वह जहाँ राम ने स्वयं स्थापित किया; काशी विश्वनाथ ब्रह्मांड के स्वामी; केदारनाथ हिमालयी शिव।

बारहों पूर्ण करना चेकलिस्ट नहीं है। यह भारतीय भू-दृश्य के माध्यम से शिव की संपूर्ण ब्रह्मांडविज्ञान का पार करना है।

The Journey — 12 Sacred Stops

इस तीर्थ यात्रा का मार्ग

सोमनाथ मंदिर
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सोमनाथ मंदिर

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम — आदि ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव — गुजरात के सौराष्ट्र तट पर प्रभास पाटण में विराजमान हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार हिरण, कपिला और सरस्वती त्रिवेणी संगम पर मिलकर सागर में समा जाती हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का आरंभ ही इसी नाम से होता है — सौराष्ट्रे सोमनाथं च। आज जिस मंदिर में भक्त प्रवेश करते हैं उसकी प्राण-प्रतिष्ठा सन् 1951 में हुई, और भक्तों की श्रद्धा है कि प्रभास की उपासना-धारा सहस्र वर्षों की टूट-फूट के बीच भी कभी नहीं रुकी।

श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, श्रीशैलम
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श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, श्रीशैलम

आंध्र प्रदेश के नल्लमला पर्वतों पर स्थित मल्लिकार्जुन — एकमात्र स्थान जो ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों है।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

उज्जैन की रुद्र सागर तट पर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक — प्रसिद्ध दक्षिणमुखी स्वयंभू लिंग तथा प्रातः 4 बजे होने वाली अद्वितीय भस्म आरती के लिए विख्यात।

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
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श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

नर्मदा नदी के बीच ॐ आकार के द्वीप पर स्थित ओंकारेश्वर — ज्योतिर्लिंग और उसके साथ ममलेश्वर का युगल दर्शन।

बाबा बैद्यनाथ (वैद्यनाथ) ज्योतिर्लिंग, देवघर
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बाबा बैद्यनाथ (वैद्यनाथ) ज्योतिर्लिंग, देवघर

झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ धाम — ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ का दुर्लभ संगम; रावण की कथा और श्रावणी मेले की महान कांवर यात्रा का स्थल।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

पुणे के निकट सह्याद्रि की वनाच्छादित पहाड़ियों में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक पावन शिवधाम, जहाँ भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था।

रामनाथस्वामी (रामेश्वरम) ज्योतिर्लिंग
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रामनाथस्वामी (रामेश्वरम) ज्योतिर्लिंग

तमिलनाडु का पवित्र द्वीप — बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, चार धाम में से एक, और भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वारका के निकट सौराष्ट्र तट पर शिव ज्योतिर्लिंग है — परंपरा से सनातन धर्म के बारह ज्योतिर्लिंगों में गिना जाता है। मंदिर अपने प्रवेश पर 25-मीटर बैठी शिव मूर्ति और शिव पुराण की उस कथा के लिए प्रसिद्ध है जिसमें शिव ने अपने भक्त सुप्रिय की रक्षा के लिए असुर दारुक का वध किया।

काशी विश्वनाथ मंदिर
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काशी विश्वनाथ मंदिर

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अत्यंत पूजनीय काशी विश्वनाथ काशी के आध्यात्मिक हृदय में विराजमान हैं, उस अविमुक्त क्षेत्र में जिसे शिव कभी नहीं छोड़ते, ऐसी परंपरा मानती है। असंख्य भक्तों के लिए यहाँ का दर्शन केवल पूजा नहीं, बल्कि हिन्दू तीर्थ-परंपरा के एक गहरे केंद्र में लौटना है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग

नासिक के पास ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में — गोदावरी का उद्गम, त्रिमुखी शिवलिंग, और नारायण-नागबलि व कालसर्प पूजा का प्रसिद्ध स्थल।

केदारनाथ मंदिर
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केदारनाथ मंदिर

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में गिने जाने वाले केदारनाथ सबसे ऊँचाई पर विराजते हैं — रुद्रप्रयाग जनपद में, गढ़वाल हिमालय के बीच, मंदाकिनी के तट पर। यह उत्तराखंड के चार धामों में से एक हैं और पंच केदार में प्रथम, जहाँ परंपरा कहती है कि शिव के वृषभ रूप का पृष्ठ भाग भूमि से प्रकट हुआ था। वर्ष के लगभग आधे महीने घाटी बर्फ़ में ढकी रहती है, इसलिए दर्शन केवल कपाट खुलने से कपाट बंद होने तक होते हैं — गौरीकुंड से पैदल, या हेलीकॉप्टर से।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग
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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

एलोरा (वेरूल) के निकट स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अंतिम — कुसुमा की अटूट भक्ति से प्रकट हुआ शिवधाम, जिसका जीर्णोद्धार 18वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया।

मार्ग का अवलोकन

Interactive map showing the complete pilgrimage route across 12 sacred destinations

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Best Time to Go

Varies by location — October to March for most, avoid monsoon for Himalayan sites (Kedarnath)

Difficulty

hard — 3–4 weeks (or split across multiple trips over a lifetime)

Fitness level required: moderate to high

What to Pack

  • Warm clothes & rain gear
  • Comfortable walking shoes
  • Medication & first aid
  • Sun protection
  • Water bottle & light snacks

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